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Rishikesh News: मलाशय कैंसर से जूझ रही महिला का रोबोटिक सर्जरी से किया सफल उपचार

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एम्स के चिकित्सकों ने रोबोटिक सर्जरी से मलाशय कैंसर की समस्या से जूझ रही महिला का सफल उपचार किया है। महिला को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। मलाशय के कैंसर के उपचार में एम्स में पहली बार रोबोटिक सर्जरी का प्रयोग किया गया है।
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पौड़ी गढ़वाल की रहने वाली 22 वर्षीय महिला मलाशय कैंसर की बीमारी से जूझ रही थी। पेट फूलने, पेट में दर्द रहने, कब्ज और मल त्याग में खून आने की समस्या से परेशान इस महिला के इलाज में एम्स के चिकित्सकों ने उपचार की उच्च तकनीक रोबोटिक सर्जरी की मदद ली।

लगभग तीन घंटे तक चली सर्जरी में चिकित्सकों ने महिला के पेट के भीतर स्थित मलाशय में फैल चुके कैंसर ग्रस्त आंत के भाग को बड़ी ही सावधानी से हटा दिया। ताकि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों को प्रभावित न कर सके। चिकित्सीय भाषा में इस विधि को एब्डोमिनो पेरिनियल रिसेक्शन कहते हैं। संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर (डॉ.) मीनू सिंह ने रोबोटिक अब्डोमिनो-पेरिनियल रिसेक्शन की सफलता पर सर्जरी करने वाले डॉक्टरों की टीम की प्रशंसा की।
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चिकित्सा अधीक्षक प्रो. संजीव कुमार मित्तल ने कहा कि एम्स में कैंसर रोगियों के उपचार के लिए विशेष शल्य क्रियाओं और उन्नत ओन्कोलॉजिकल देखभाल की व्यवस्थाएं हैं। सर्जिकल ओन्कोलॉजी विभाग इसमें विशेष भूमिका निभा रहा है।

सर्जरी करने वाली टीम में डॉ .अमित गुप्ता, डॉ. सुधीर सिंह, डॉ. मरेश्वरी, डॉ. अजित, डॉ. निर्भय, डॉ. विवेक, डॉ. भावना गुप्ता, डॉ. दर्शन, मुकेश, साक्षी, सौम्या शामिल रहे।





बीते वर्ष फरवरी से थी समस्या



चिकित्सकों ने बताया कि महिला को यह समस्या फरवरी 2023 से बनी थी। अप्रैल 2023 में जब वह पहली बार एम्स के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग की ओपीडी में आई तो आवश्यक जांच रिपोर्टों के आधार पर पता चला कि उसे मलाशय कैंसर है और वह फैल रहा है। आंतों के अंदर का मामला देखते हुए पहले नियोएडजुवेंट कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के माध्यम से उपचार शुरू किया गया। लेकिन लाभ न मिलने पर त्वरित इलाज के लिए रोबोटिक एब्डोमिनो-पेरिनियल रिसेक्शन की योजना अमल में लाई गई।





क्या है एब्डोमिनो पेरिनियल रिसेक्शन

इस सर्जरी में रक्तस्राव नहीं होता है और दर्द व परेशानी बहुत कम होने से मरीज को ज्यादा दिनों तक अस्पताल में रहने की जरूरत नहीं पड़ती है। रोबोटिक सर्जरी में कैंसर ग्रस्त गुदा, मलाशय और सिग्मॉइड बृहदान्त्र के हिस्से को हटा दिया जाता है। चूंकि आंत का सिरा पेट की सतह में एक छेद से जुड़ा होता है इसलिए इस पूरी प्रक्रिया के दौरान पेट के भीतर सभी अपशिष्ट को शरीर से बाहर एक डिस्पोजेबल बैग में एकत्र किया गया।





सप्ताह में 3 दिन होती है ओपीडी

डॉ. अमित गुप्ता ने बताया कि एम्स में कैंसर से पीड़ित मरीज सर्जिकल ऑन्कोलॉजी की ओपीडी में मंगलवार, शुक्रवार और शनिवार को सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक आ सकते है। विभाग में सभी प्रकार के कैंसर के इलाज की सुविधा उपलब्ध है।
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