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Rishikesh News: कभी आईडीपीएल फैक्टरी से चलता था हजारों लोगों का रोजगार

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Iक्षेत्र में रहती थी रौनक, ड्यूटी शेड्यूल के लिए बजने वाला कंपनी का हूटर लोगों को बताता था समयI
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सोवियत संघ के सहयोग से बनीं आईडीपीएल फैक्टरी में कभी हजारों लोगों को रोजगार मिला था। तब युवाओं की पहली पसंद आईडीपीएल फैक्टरी होती थी। फैक्टरी से लेकर सड़कों, आवासीय कॉलोनियों और बाजारों में सुबह से शाम तक रौनक रहती थी। ड्यूटी शेड्यूल के लिए बजने वाला कंपनी का हूटर लोगों को समय बताता था।

1962 में वीरभद्र क्षेत्र में एंटीबॉयोटिक्स दवाइयों के लिए आईडीपीएल (इंडियन ड्रग्स एंड फार्मास्युटिकल्स लिमिटेड) फैक्टरी की स्थापना की गई थी। इस फैक्टरी में पैंसिलीन, स्ट्रेप्टोमाईसिन, ट्रेटासाईक्लीन सहित एंटी फंगल टैबलेट का उत्पादन किया जाता था। इस फैक्टरी में पांच हजार स्थायी और चार हजार अस्थायी कर्मचारी थे। कई युवा अप्रेंटिस करने के लिए भी आते थे। 1965 के बाद फैक्टरी में अच्छा उत्पादन होने लगा था। यहां से उत्पादित अधिकांश दवाइयों की खपत सरकारी अस्पतालों में होती थी।
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स्थानीय निवासी दीपक बताते हैं कि 1970 के दशक में लोग दूसरे राज्यों की बजाय आईडीपीएल में नौकरी करना पसंद करते थे। कंपनी के कर्मचारियों के लिए 2600 आवासीय क्वार्टर बनाए गए थे। फैक्टरी में काम करने कर्मचारियों के बच्चे आईडीपीएल इंटर कॉलेज में पढ़ते थे। इसके अलावा केंद्रीय विद्यालय, अस्पताल, सामुदायिक केंद्र, पंजाब नेशनल बैंक, भारतीय स्टेट बैंक, पोस्ट ऑफिस, अग्निशमन केंद्र, पेट्रोल पंप, बीएसएनएल का एक्सचेंज भी था। शॉपिंग बाजार भी था, जिसका नाम लवली स्टोर है।

सामुदायिक केंद्र में लोग अपने बच्चों का विवाह और अन्य कार्यक्रम संपन्न करते थे। कर्मचारियों को लाने ले जाने के लिए बसें थी। जिनमें कई बार स्थानीय लोग भी सफर करते थे। जो लोग गीतानगर, बापूग्राम, सुमन विहार और ऋषिकेश स्थित घरों से आते थे, वह साइकिलों से ही आते थे। कुछ सीनियर कर्मचारियों के पास स्कूटर हुआ करता था। फैक्टरी में आठ घंटे की एक जनरल शिफ्ट और तीन अन्य शिफ्ट लगती थी। आईडीपीएल में कर्मचारी यूनियनों के भी कार्यालय हुआ करते थे। 1991 की औद्योगिक नीति आने के बाद आईडीपीएल को रुग्ण इकाई घोषित कर दिया था। उसके बाद फैक्टरी के बुरे दिन शुरु हो गए थे।
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Iहर दिन पांच ट्रक माल होता था तैयारI



ट्रांसपोर्टर जगमोहन सकलानी बताते हैं कि 60 के दशक में आईडीपीएल फैक्टरी की स्थापना के बाद स्थानीय ट्रांसपोर्टरों को भी काम मिलता था। उस समय आईडीपीएल फैक्टरी से प्रतिदिन पांच से छह ट्रक माल तैयार होता था। ट्रक दूसरे राज्यों से कच्चा माल लेकर भी आते थे। ढालवाला स्थित फैक्टरियों और प्रिंटिंग प्रेस को भी काम मिलता था। लेकिन 1991 के बाद काम कम हो गया।
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