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I- भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड की ओर पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर किया जा रहा कृत्रिम गर्भाधान
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I- माजरी, पशुलोक और पुरानी चुंगी में बकरियों में किया कृत्रिम गर्भाधानI
उत्तराखंड भेड़ एवं ऊन विकास बोर्ड की ओर से पशुलोक में बनाई गई राज्य भेड़ एवं बकरी कृत्रिम गर्भाधान प्रयोगशाला के परिणाम आने शुरू हो गए हैं। बोर्ड के डॉक्टरों की ओर से अलग-अलग स्थानों पर जाकर 50 बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान किया गया। जिसमें 10 बकरियों के मेमने हुए हैं। यह काम पायलट प्रोजेक्ट के तहत हो रहा है। बोर्ड को आने वाले दिनों में अच्छे परिणाम की उम्मीद है।
पशुलोक में जमुनापारी, सिरोही, बरबरी, बीटल, जखराना प्रजाति के 22 बकरे हैं। इन बकरों का सीमेन एकत्रित कर प्रयोगशाला में जांच के बाद सुरक्षित रखा जाता है। बोर्ड की ओर से इसी सीमेन से ऋषिकेश में तीन स्थानों और भगवानपुर हरिद्वार में 50 बकरियों का कृत्रिम गर्भाधान किया गया था। 25 का परिणाम आया है, जिसमें 10 मेमने हुए हैं। यह कार्यक्रम पिछले साल अगस्त माह से चल रहा है।
इसके अलावा हरिद्वार, ऊधम सिंह नगर, देहरादून, नैनीताल और उत्तरकाशी के 50 डॉक्टरों को 17 हजार 739 डोज (मात्रा) सीमेन उपलब्ध कराया गया। उत्तर प्रदेश, बिहार और राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड को 13 हजार 531 डोज (मात्रा) उपलब्ध कराई गई। आने वाले दिनों में परिणाम और अच्छे आएंगे।
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Iऋषिकेश, माजरी और भगवानपुर में 50 बकरियों में कृत्रिम गर्भाधान किया गया था। जिसमें 25 का परिणाम आया है। 10 मेमने हुए हैं। आने वाले दिनों में अच्छा परिणाम आएगा। अभी यह काम पायलट प्रोजेक्ट के तहत हो रहा है। - अमित अरोड़ा, प्रभारी डॉक्टर राज्य भेड़ एवं बकरी कृत्रिम गर्भाधान प्रयोगशाला पशुलोकI