कथावाचक चित्रलेखा को रुद्राक्ष भेंट करते स्वामी चिदानंद सरस्वती। स्रोत परमार्थ मीडिया।
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स्वर्गाश्रम में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में स्वामी चिदानंद सरस्वती ने प्रतिभाग किया। उन्होंने कहा कि कथावाचक देवी चित्रलेखा की कथा शैली में सरलता है, उनकी वाणी में गहराई और प्रभाव है। हर शब्द मन की परतों को खोल देता है। भागवत के प्रसंग चाहे भगवान कृष्ण की बाल लीलाएं हों, मीरा बाई की भक्ति हो, सुदामा की निष्ठा हो या प्रह्लाद का विश्वास हो, हर प्रसंग जीवन के सत्य को उजागर करता है। उन्होंने कथावाचक देवी चित्रलेखा और जांगिड सेवा संघ के पदाधिकारियों को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर हरित कथाओं के आयोजन का संदेश दिया।