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Rishikesh News: मिटकर भी अमर हो गई मासूम

Tue, 13 Jan 2026 01:40 AM IST
देहरादून ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऋषिकेश
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बच्ची का देहदान करने वाले परिजनों को सम्मानित करती एम्स टीम। स्रोत : एम्स
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एम्स में मानवता की एक ऐसी मिसाल पेश की गई, जिसने सबकी आंखों में आंसू और दिल में सम्मान भर दिया। मात्र 8 दिन की एक नवजात बच्ची की मृत्यु के बाद, उसके माता-पिता ने भारी मन लेकिन अडिग संकल्प के साथ उसका शरीर चिकित्सा शिक्षा के लिए दान कर दिया। उनकी भावना केवल इतनी है कि उनकी बच्ची भविष्य के डॉक्टरों की पढ़ाई में सहायक बनकर किसी और के जीवन को नया उजाला दे सके। बीते 2 जनवरी को चमोली निवासी हंसी देवी पत्नी संदीप राम ने मेडिकल कॉलेज श्रीनगर में एक बेबी को जन्म दिया। शिशु की आंतों में तंत्रिका गुच्छों का अभाव था। चार जनवरी को परिजन नवजात को लेकर एम्स पहुंचे। रविवार को उसकी रिफ्रैक्टरी सेप्टिक शॉक के कारण मृत्यु हो गई। अपने जिगर के टुकड़े को खोने से परिवार पर दुख का पहाड़ टूट पड़ा। एम्स के नर्सिंग स्टाफ ने मृत नवजात के परिजनों का संपर्क मोहन फाउंडेशन के प्रोजेक्ट लीडर संचित अरोड़ा से करवाया। अरोड़ा नेत्रदान कार्यकर्ता गोपाल नारंग के साथ एम्स पहुंचे। अरोड़ा व नारंग ने परिजनों को देहदान के लिए प्रेरित किया। परिजनों की सहमति पर अरोड़ा ने एम्स ऋषिकेश के एनाटॉमी विभाग से संपर्क किया और देहदान की औपचारिकताएं पूर्ण कर मृत नवजात की देह विभाग को सौंपी। एम्स के पीआरओ डॉ. श्रीलॉय मोहंती ने बताया कि उपचार के दौरान आठ दिन के नवजात की मौत हो गई थी। परिजनों ने एम्स को मृत नवजात की देहदान की है।
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