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त्रिवेणीघाट और पूर्णानंद आस्था पथ को जोड़ने वाले वैली ब्रिज निर्माण के लिए शासन गंभीर नहीं है। वैली ब्रिज निर्माण के लिए सिंचाई विभाग की ओर से डीपीआर तैयार कर कई प्रस्ताव विभिन्न मदों में शासन को भेजे गए हैं। लेकिन इस पर शासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई है।
ऋषिकेश के त्रिवेणीघाट और मुनि की रेती के पूर्णानंद आस्था पथ के बीच से चंद्रभागा नदी बहती है। जिससे देहरादून और टिहरी जनपद के गंगा तटों किनारे बनाए गए आस्था पथ एक दूसरे के कटे हुए हैं। इनको आपस में जोड़ने की मांग स्थानीय लोग लंबे समय से कर रहे हैं। सिंचाई खंड ऋषिकेश कार्यालय की ओर से भी चंद्रभागा नदी पर वैली ब्रिज निर्माण की डीपीआर तैयार कर कई बार विभिन्न मदों में प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं। इसके निर्माण लिए वन मंत्री सुबोध उनियाल भी कई बार घोषणाएं कर चुके हैं।
शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने भी सीएम को क्षेत्र में विकास कार्यों के लिए दिए मांगपत्र में इसे शामिल किया था। स्वयं मुख्यमंत्री धामी भी दोनों आस्था पथों को जोड़ने के लिए चंद्रभागा नदी पर वैली ब्रिज बनाने की घोषणा कर चुके हैं। लेकिन अब तक धरातल पर कुछ भी दिखाई नहीं दिया है। जिससे स्पष्ट है कि शासन स्तर के नौकरशाहों की वैली ब्रिज निर्माण में कोई रूचि नहीं है।
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Iत्रिवेणीघाट और पूर्णानंद आस्था पथ को जोड़ने के लिए चंद्रभागा नदी पर वैली ब्रिज निर्माण के लिए डीपीआर तैयार कर शासन को भेजी गई है। वैली ब्रिज की लंबाई 85 मीटर और चौड़ाई छह मीटर होगी। जिसकी लागत 10.66 करोड़ रुपये होगी। - अनुभव नौटियाल, एसडीओ, सिंचाई खंड, ऋषिकेशI