परमार्थ निकेतन में नमामि गंगे और अर्थ गंगा की ओर से आयोजित गंगा जागरूकता और आरती प्रशिक्षण कार्यशाला का समापन हो गया। जिसमें भारत के चार राज्यों से 23 घाटों के 35 पुरोहितों ने प्रतिभाग किया।
बुधवार को प्रशिक्षण कार्यशाला के समापन पर स्वामी चिदानंद सरस्वती ने पुरोहितों को अपने घाटों पर गंगा आरती करने और आरती के माध्यम से पर्यावरण के प्रति जन जागरूकता फैलाने का संकल्प कराया। कहा कि गंगा आरती के माध्यम से सभी को जोड़ें और तटों को प्रदूषित होने से बचाएं। सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग न करें और अधिक से अधिक पौधरोपण करने का संदेश प्रसारित करें। राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन के महानिदेशक अशोक कुमार ने कहा कि नमामि गंगे ने बीते वर्ष से परमार्थ निकेतन के साथ जुड़कर आरती कार्यशाला की शुरुआत की है। अभी तक चार ग्रुपों को प्रशिक्षित किया जा चुका है और यह पांचवां ग्रुप है।
सलाहकार जगमोहन गुप्ता ने कहा कि गंगा आरती में एक डिवाइन कनेक्शन अनुभव होता है। प्रशिक्षण में बताए गए मॉडल पर सभी को अपने घाटों पर गंगा आरती करनी है। आरती के माध्यम से लोगों में गंगा के प्रति आस्था जगानी है और गंगा का संरक्षण करना है। इस दौरान सभी प्रतिभागियों को रुद्राक्ष की माला, पौधा और आरती का प्रमाणपत्र प्रदान किए गए।