वन महकमे की दो रेंजों की सीमाओं के बीच पड़ने वाले रायवाला क्षेत्र के पांच गांवों के ग्रामीण बंदरों का आतंक झेलने को मजबूर है। उन्हें लाठी, डंडे और गुलेल के सहारे अपनी सुरक्षा स्वयं करनी पड़ रही है। शासन की ओर से बंदर गणना और पकड़ने की कार्रवाई से वंचित इस क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे बंदरों ने ग्रामीणों का जीना कर दिया है। लगातार गुहार के बाद भी अधिकारियों के कान में जूं तक नहीं रेंग रही है।
प्रतीतनगर, खांड गांव, रायवाला, हरिपुरकलां, गौहरीमाफी ग्रामसभाओं में सुबह से शाम तक बंदरों का आतंक क्षेत्रवासियों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है। बंदरों के झुंड घरों में घुसकर खाने के साथ ही अन्य सामान भी उठा ले जाते हैं। आए दिन बंदर लोगों को काटकर घायल भी कर रहे हैं। परेशान ग्रामीण बंदरों से सुरक्षा की लगातार गुहार लगा रहे हैं।
लेकिन विभागीय अधिकारियों ने इस समस्या से कोई लेना देना नहीं है। पिछले कई वर्षों से बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई नहीं होने से क्षेत्र में बंदरों की संख्या लगातार बढ़ रही है। हिंसक बंदर आए दिन ग्रामीणों पर हमला कर आर्थिक और शारीरिक नुकसान पहुंचा रहे हैं। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने बच्चों को हो रही है।
क्षेत्र में दो दर्जन से अधिक सरकारी और निजी विद्यालयों के स्कूली बच्चों का आवागमन खतरे से खाली नहीं है। ग्रामीण भगत सिंह नेगी, ओमप्रकाश भारती, राजेश कुमार, अमर सिंह और शांति देवी वे बताया कि उन्हें लाठी, डंडों आदि से खुद अपनी सुरक्षा करनी पड़ रही है।
वन विभाग की लापरवाही पड़ रही भारी
राज्य सरकार की ओर से प्रदेश भर के पार्क और वन प्रभागों की सभी रेंजों में अगस्त 2015 को चलाए गए बंदर जनगणना कार्यक्रम में इस क्षेत्र को नजरंदाज कर दिया गया था। इसका ही परिणाम है कि क्षेत्र की ग्राम पंचायतों में लगातार बढ़ रही बंदरों की संख्या ग्रामीणों के जनजीवन पर भारी पड़ रही है। जबकि इस तरह की लापरवाही करने वालों के खिलाफ विभाग के आला अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
रायवाला क्षेत्र में बंदरों की समस्या से परेशान ग्रामीणों के विषय में अधिकारियों से जानकारी ली जाएगी। जल्द समस्या के समाधान के लिए उचित कार्रवाई की जाएगी।-दिनेश अग्रवाल, वन एवं खेल मंत्री उत्तराखंड शासन