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Rishikesh News: केरल में मिले अनुभव को धरातल पर उतारेंगे रानीपोखरी ग्राम प्रधान

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रानीपोखरी ग्रांट के ग्राम प्रधान सुधीर रतूड़ी केरल में पंचायतों के आईएसओ प्रमाणीकरण विषय पर आयोजित तीन दिवसीय कार्यशाला में शामिल होकर वापस लौटे हैं। कहा कि केरल में पंचायतें नगर निगम की तरह कार्य करती है।
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रविवार को वापस लौटने पर स्थानीय लोगों व ग्राम प्रधानों की ओर से पंचायत घर में उनका स्वागत किया गया। ग्राम प्रधान रतूड़ी ने कहा कि कार्यशाला में 25 राज्यों के सरपंचों व संबंधित अधिकारियों ने भाग लिया। उन्होंने रानीपोखरी ग्राम पंचायत के विकास मॉडल और आय के साधनों को बताते हुए अपने अनुभव साझा किए।



उन्होंने कार्यशाला में बताया कि प्रधानमंत्री स्वच्छ भारत मिशन के अंतर्गत उनकी ग्राम पंचायत में बेहतर कार्य हुए हैं। वहीं हाट बाजार और अन्य साधनों से आय के साधन बढ़ाए गए हैं। केरल में कार्यशाला के दौरान उन्हें पता चला कि केरल की पंचायतों को वहां की सरकार ने कई अधिकार दिए हैं। जिससे वहां के सरपंच या प्रधान मिनी सरकार के रूप में यहां से बेहतर कार्य कर रहे हैं।
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वहां एक पंचायत में विभिन्न विभागों के चालीस तक कर्मचारी पंचायत घर में रोज बैठते हैं। जिसमें पंचायत सचिव एक राजपत्रित अधिकारी के रूप में कार्य करते हैं। टोकन सिस्टम से सभी विभागों के अधिकारी समस्याएं सुनते हैं। विभिन्न कार्यों के लिए पंचायत का एक अपना जेई होता है। खास बात यह है कि वहां की पंचायतें किसी नगर निगम की तरह कार्य करती हैं। वहां पंचायतें हाऊस टैक्स वसूलती हैं। इस मौके पर संदीप जायसवाल, पंकज नेगी, भोगपुर प्रधान संजीव नेगी, भरत मनवाल, बडकोट प्रधान अनिल कुमार, प्रवेश कश्यप, गडूल प्रधान धर्मपाल आदि मौजूद रहे।






पंचायतों को राजस्व विभाग देता है टैक्स



ग्राम प्रधान रतूड़ी ने कहा कि केरल में पंचायतों में जमीनों की खरीद फरोख्त पर राजस्व विभाग की ओर से एक प्रतिशत टैक्स वहां की पंचायतों को दिया जाता है। दुकानों और व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर भी टैक्स लगाया गया है, जिससे आय इतनी है कि वहां पंचायतों ने करोड़ों की एफडी जमा कर रखी हैं। वहां पंचायतों में तीस हजार तक की आबादी निवास करती है। कहा कि इस तरह की कार्यशाला उत्तराखंड में पंचायत चुनाव संपन्न होने के तुरंत बाद होनी चाहिए थी, जिससे नवनिर्वाचित प्रधानों को अधिक सीखने को मिलता।
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