बारिश में सड़कें क्षतिग्रस्त होने, पेयजल स्रोत की मरम्मत न होने से दिउली ग्राम पंचायत के लोग संकट में हैं, लेकिन गांव की प्रधान उर्मिला पयाल दिल्ली में जा बसी हैं। ग्राम प्रधान लंबे से गांव में नहीं हैं, इस कारण लोगों के जरूरी काम भी रुके हुए हैं। उपप्रधान भी तीन वर्ष पूर्व गांव से पलायन कर चुकी हैं।
ऐसे में ग्रामीण प्रशासक नियुक्त करने की मांग कर रहे हैं। इस मामले में प्रधान उर्मिला ने कहा, वह कहां हैं, गांव में कार्य क्यों प्रभावित हो रहे हैं यह जानने का अधिकार आपको नहीं है। दिउली ग्राम पंचायत में दिउली एवं बंस्टोला गांव हैं। पंचायत में करीब 350 मतदाता हैं।
ग्रामीण कुसुम कुकेरती ने बताया कि ग्राम प्रधान दिउली काफी समय से गांव में न रहकर दिल्ली में रह रही हैं। गांव में आम बैठक नहीं हो पाई है। ग्रामीणों ने शिक्षित होने के कारण उन्हें प्रधान चुना था, लेकिन आज ग्रामीण अपने छोटे-छोटे कार्यों के लिए भी विकास खंड कार्यालयों के चक्कर काटने को मजबूर हैं। उप प्रधान भी तीन वर्ष पूर्व गांव से पलायन कर चुकी हैं।
ग्रामीण ज्योति बाला, रजनी देवी, दीपा देवी, सरोज पयाल, पूनम पयाल ने बताया कि कई बार ब्लॉक प्रशासन को ग्राम प्रधान के अनुपस्थित रहने की सूचना दी जा चुकी है। इसके बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। ग्रामीणों ने ग्राम प्रधान को पदमुक्त कर प्रशासक बैठाने की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि इस संबंध में डीएम से भी शिकायत की जाएगी।
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ये कार्य हुए प्रभावित
- जमीन का दाखिल खारिज कराने एवं अन्य कार्यों हेतु उत्तर जीवी प्रमाण पत्र नहीं बन पा रहा है।
- सुनील कुकरेती
- ग्राम पंचायत की खुली बैठक न होने से 60 वर्ष पूर्ण होने पर समाज कल्याण विभाग से मिलने वाली वृद्ध पेंशन/किसान पेंशन के लिए प्रस्ताव नहीं बन पा रहे हैं।
- दयाराम कुकरेती
- नंदा गौरा योजना के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं। इसके लिए ग्राम प्रधान की ओर से अविवाहित प्रमाणपत्र की आवश्यकता होती है।
- श्रुति
पिछले वर्ष नवम्बर माह में ग्राम पंचायत की आम बैठक हुई थी। नियमानुसार ग्राम पंचायत में त्रैमासिक बैठक होना अनिवार्य है।
-अलका रावत, ग्राम पंचायत विकास अधिकारी।
ग्राम प्रधान छुट्टी पर हैं इसकी ब्लॉक को कोई सूचना नहीं है। ग्रामीणों की मांग के संबंध में जानकारी जुटाई जाएगी।
- दिनेश सिंह रावत, सहायक विकास अधिकारी यमकेश्वर।