एम्स की ओर से विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जा रहा है। इसके तहत सोमवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र रायवाला में आशा कार्यकत्रियों, एएनएम, आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों सहित सभी फ्रंटलाइन वर्कर्स के लिए कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें स्तनपान से संबंधित तकनीकी प्रशिक्षण और इससे जुड़ी व्यवहारिक जानकारियां दी गईं।
एम्स की डीन एकेडमिक प्रो. जया चतुर्वेदी ने बताया कि एक मां और शिशु के बीच का महत्वपूर्ण बंधन मां के दूध से बनता है। मां का दूध बच्चे के लिए अमृत के समान है। नवजात को कम से कम छह महीने तक स्तनपान कराना चाहिए। सीएफएम विभागाध्यक्ष प्रो. वर्तिका सक्सेना ने इस वर्ष की थीम क्लोजिंग द गैप ब्रेस्ट फीडिंग सपोर्ट फॉर ऑल की महत्ता को समझाया। इस दौरान एमबीबीएस के छात्र-छात्राओं के लिए पोस्टर प्रतियोगिता भी आयोजित हुई। छात्र-छात्राओं ने अपनी कलाकृतियों के माध्यम से स्तनपान की महत्ता का संदेश दिया। अव्वल प्रतिभागियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस मौके पर डॉ. पल्लवी सिंह, जेआर डॉ. जोएन मैथ्यू, डॉ. अनिकेत गौर, डॉ. शिखा, डॉ. सेवाप्रीत, सुमित वैद्य, गीता आदि मौजूद रहे। इसके अलावा एम्स के अंतर्गत संचालित प्राथमिक चिकित्सा केंद्र में नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। इस मौके पर डॉ. अभिषेक शांडिल्य, डॉ. रोहित कटरे, डाॅ. अनिकेत गौर, डॉ. प्रज्ञा यादव, डॉ. कंचन गुप्ता, डॉ. एकता पाठक, डॉ. ग्नानेश्वर, कॉलेज ऑफ नर्सिंग प्राचार्य डॉ. स्मृति अरोड़ा, डॉ. विश्वास आदि मौजूद रहे।