ऋषिकेश। विश्व लंग्स कैंसर दिवस पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने बताया कि फेफड़े जीवन का आधार और सांसों का स्रोत हैं। सांस जीवन की सबसे मूल और अनिवार्य क्रिया है। बिना भोजन कुछ दिनों तक, बिना जल कुछ समय तक जीवित रह सकते हैं लेकिन बिना सांस के कुछ मिनट भी नहीं रहा जा सकता। यह वह अदृश्य जीवनरेखा है जो हमारे अस्तित्व को बनाए रखती है, लेकिन जब यही हवा, जो हमें जीवन देती है, विषैली हो जाए, तो सबसे पहले आघात हमारे फेफड़ों पर होता है। आज के युग में वायु प्रदूषण एक मौन हत्यारा बन चुका है। इसका समाधान भी हमारे ही हाथों में है। फेफड़ों की रक्षा के लिए किसी बड़े बदलाव की नहीं, बल्कि छोटे-छोटे संकल्पों की आवश्यकता है। साथ ही अधिक से अधिक संख्या में पौधरोपण करने की आवश्यकता है। संवाद