सराफा कारोबारियों की हड़ताल के समर्थन में नगर बंद का व्यापक असर रहा। सुबह से ही व्यापारिक प्रतिष्ठानों में ताले लटके रहे। सड़कों पर उतरे बंद समर्थकों ने इक्का दुक्का स्थानों पर खुली दुकानों को जबरन बंद कराया। शहर के आसपास क्षेत्रों से जरूरत का सामान लेने आए लोगों को निराश होकर बैरंग लौटना पड़ा।
दो लाख के गहने खरीद पर ग्राहकों के लिए पेनकार्ड और एक प्रतिशत उत्पाद शुल्क जमा कराने की अनिवार्यता के विरोध में स्वर्णकारों की हड़ताल 13वें दिन भी जारी रही। सोमवार को शहर के विभिन्न व्यापारिक संगठनों ने हड़ताल को समर्थन देते हुए बाजार बंद रखा। व्यापारिक प्रतिष्ठान नहीं खुले। इक्का दुक्का स्थानों पर जो प्रतिष्ठान खुलें थे, उन्हें बंद समर्थकों ने बंद करवाया। दुपहिया वाहन में सवार बंद समर्थकों की टोली घूमती नजर आई।
हड़ताल में दवा विक्रेता काली पट्टी बांधकर शामिल रहे। मेडिकल स्टोर न खुलने से मरीज और तीमारदार दवा के लिए इधर-उधर भटकते रहे। दोपहर बाद भी प्रतिष्ठानों में ताले लटकने से आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बाजार जरूरी सामान खरीदने आए लोगों को निराशा हुई। बंद समर्थकों में केमिस्ट एसोसिएशन अध्यक्ष संदीप मल्होत्रा, रेडीमेड गारमेंट्स संघ के अध्यक्ष श्रवण जैन, व्यापार सभा अध्यक्ष नवल कपूर, नगर उद्योग व्यापार प्रतिनिधिमंडल के महासचिव जय दत्त शर्मा, ललित मिश्र व जयेंद्र रमोला आदि शामिल थे।
पीछे नहीं हटेंगे
ऋषिकेश स्वर्णकार संघ के अध्यक्ष यशपाल पंवार ने बंद को सफल बनाने में व्यापारिक संगठनों का आभार जताया। उन्होंने चेताया कि जब तक केंद्र सरकार अनाप शनाप कानून को रद्द नहीं करेगी, उनकी हड़ताल जारी रहेगी।