श्यामपुर में श्रीमद्भागवत कथा सुनाते कथावाचक पंडित श्याम सुंदर।
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ब्यूरो/अमर उजाला/ऋषिकेश।
श्रीमद्भागवत में श्री कृष्ण की बाल लीलाओं से लेकर बाल संस्कारों के साथ जीवन दर्शन और मोक्ष का ज्ञान प्राप्त होता है। कथा का मर्म जीवनभर काम आता है।
यह बातें भागवताचार्य श्याम सुंदर ने बुधवार को श्यामपुर में श्याम शरणम संस्थान की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में कहीं।
भागवताचार्य श्याम सुंदर ने कहा कि शुकदेव जी ने तो स्वर्ग से लाया गया अमृत भी ठुकरा दिया और कहा कि भागवत कथा अमृत से भी बढ़कर है। यह ऐसी कथा है जिसके श्रवण मात्र से अमरत्व प्राप्त हो जाता है। उन्होंने कहा कि बच्चों को पांच से 12 वर्ष तक सुंदर संस्कार देने का समय उत्तम है। इसलिए अपनी नई पीढ़ी को सुंदर संस्कारों की संपत्ति दें वह जीवनभर काम आएगी। इस मौके पर समिति की सचिव कुसुम जोशी, समाजसेवी विनोद जुगलान, कमलनैन बहुगुणा, मायाराम बैलवाल, राम सिंह असवाल, राजेंद्र सिंह चौहान, विकास गैरोला, किशोरी प्रसाद, चैत राम नौटियाल, जोतराम शर्मा, दीपक कुलियाल, मुकेश भट्ट, अनूप भट्ट, मंगल सिंह, आलोक कुमार, ब्रह्मानंद, दर्शनी चौहान, सविता गैरोला, कांता नेगी, विजयलक्ष्मी धनाई, लक्ष्मी चौहान आदि मौजूद रहे।