बाल शल्य चिकित्सा दिवस का आयोजन: अस्पताल
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हिमालयन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज जौलीग्रांट में बाल शल्य चिकित्सा दिवस के अवसर पर एक जागरूकता अभियान का आयोजन किया गया। जन्म से 18 वर्ष तक के बच्चों में जन्मजात विकृतियों से संबंधित विभिन्न प्रकार की बीमारियों के बारे में लोगों को जागरूक किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. संतोष कुमार ने कहा कि बच्चों में सर्जरी की जरूरत वाली समस्याओं को दो श्रेणियों में बांटा गया है। जिसमें जन्मजात विकृतियां और बाद में विकसित होने वाली समस्याएं शामिल हैं। माता-पिता की जागरूकता ही पहला बचाव है। समय पर लिया गया निर्णय बच्चे को जीवनभर की अक्षमता से बचा सकता है। जन्मजात विकृतियां में मलद्वार का विकसित न होना, खाने की नली सांस की नली से जुड़ी होना, हर्निया, पेशाब से संबंधित हाइपोस्पेडिया, पेट के ट्यूमर, पथरी आदि शामिल हैं।