ऋषिकेश। परमार्थ निकेतन आश्रम में भारतीय जनसंघ के संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मनाई गई। आश्रम परिसर में विशेष हवन कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई। आश्रमाध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके आदर्श और सिद्धांत विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में बहुमूल्य योगदान हैं। भारत की एकता और अखंडता के लिए उनका संघर्ष अविस्मरणीय है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 के विरुद्ध आवाज उठाई और दो विधान, दो प्रधान, दो निशान को भारत की एकता के लिए खतरा बताते हुए कहा कि एक देश में दो विधान, दो प्रधान और दो निशान नहीं चलेंगे। उनका बलिदान भारत की एकता के लिए था, जिसे युगों तक स्मरण किया जाएगा। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी एक व्यक्ति ही नहीं एक विचारधारा हैं। उनके सिद्धांत, आदर्श और बलिदान आज भी भारत की आत्मा में जीवित हैं। संवाद