पांच महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को दे रही स्वरोजगार का प्रशिक्षण
न्याय पंचायत श्यामपुर के ग्रामसभा खदरी खडकमाफ निवासी हस्तशिल्प शिक्षिका ईशा कलूड़ा क्षेत्र के स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बना रही हैं। वह बिना किसी शासन-प्रशासन के सहयोग के महिलाओं को हस्तशिल्प की कला सिखा रही हैं।
शिक्षिका ईशा कलूडा इन दिनों रक्षाबंधन की तैयारियों को लेकर पांच स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को राखी बनाने का प्रशिक्षण दे रही हैं। जिसमें एकता महिला, पहाड़ी नोनी, प्यारी पहाड़न, मेरु पहाड़ और सरस्वती स्वयं सहायता समूह शामिल हैं। जिन्हें राखियां के डिजाइन, क्वालिटी, बनावट के साथ ही उनकी पैकिंग के तरीके सिखाए जा रहे हैं। जिससे वह भविष्य में स्वरोजगार के माध्यम से अपनी आजीविका को बढ़ाकर खुद को सशक्त बना सकें।
ईशा कलूड़ा ने बताया कि इस वर्ष भीमल और पीरुल से सुंदर राखियां बनाने का प्रयास किया है। इसी दक्षता के कारण उन्होंने उत्तराखंड की राज्य हस्तशिल्पकार प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। वह वर्तमान में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के समूह से भी जुड़ी हैं। सोनिया बलोदी, सरिता पाल, आरती, रुचि बंदोलिया, दीपा, संजू ममता, रचना, मंजीता, सुमन लता, पूनम रतूड़ी, राधिका, आराधना नौटियाल, नंदिनी चौहान आदि महिलाओं को हस्तशिल्प का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
पीरुल, भीमल और गोबर की बनाई हैं राखियां
ईशा कलूडा ने बताया कि पीरुल (चीड़ की पत्तियों), भीमल (भीमल से प्राप्त होने वाला रेशे) और गाय के गोबर की राखियां तैयार की हैं। राखियां सुंदर दिखने के साथ ही सुगंधित भी हैं। भीमल और पीरुल की राखियों के आर्डर आने लगे हैं। ये राखियां आमजन के बजट के अनुरूप तैयार की गई हैं। जिससे हर वर्ग के व्यक्ति इनको खरीद सकें। गाय के गोबर की राखियां पूजा में इष्ट देवों को प्रथम राखी चढ़ाने के उद्देश्य से भी बनाई गई हैं।