एम्स में आयोजित छह दिवसीय डायबिटीज एजुकेशन ट्रेनिंग प्रोग्राम के तहत विशेषज्ञ चिकित्सकों ने मधुमेह रोगियों को होने वाली दिक्कतों पर व्याख्यान दिए। जिसमें प्रतिभागियों को मधुमेह से ग्रसित मरीजों की सहायता संबंधी जानकारियां दी गई।
शनिवार को कार्यशाला में डॉ. संतोष कुमार ने मधुमेह से ग्रसित मरीजों को होने वाली मानसिक दिक्कतों से अवगत कराया। बताया कि मरीजों को सिर्फ दवा की जरूरत नहीं पड़ती है। स्वयं को मरीज की जगह रखकर सोचने और उन्हें बेहतर उपचार देने की जरूरत है। डॉ. वैंकटेश पई ने मधुमेह ग्रसित मरीजों को होने वाले दर्द और उसके निवारण की जानकारी दी। कार्यशाला में डॉ. मुकेश बैरवा, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. बैल्सी, डॉ. प्रसूना जैली, दीपिका चौहान आदि ने भी विचार व्यक्त किए। इस दौरान प्रतिभागियों ने एंडोक्राइन लैब और गेट लैब का अवलोकन किया। मधुमेह ग्रसित रोगियों को प्रयोगशालाओं के माध्यम से मिलने वाली गेट थेरेपी के उपयोग व सहायता की जानकारी हासिल की।