गणपति बप्पा मोरया, मंगल मूर्ति मोरया, अगले बरस तू जल्दी आना के जयकारों के साथ भक्त गणनायक को विदा करने के लिए घर और पंडालों से निकले। अबीर-गुलाल उड़ाते और डीजे पर बजते गानों पर थिरकते श्रद्धालु गणपति की प्रतिमा को लेकर गंगा तट पर पहुंचा। यहां नम आंखों से श्रद्धालुओं ने अपने आराध्य गणपति को गंगा में विसर्जित कर विदाई दी।
31 अगस्त को शहर में घरों और पंडालों में श्रद्धालुओं ने गणपति की प्रतिमा स्थापित की थी। शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी पर घरों और पंडालों पर श्रद्धालुओं ने सुबह से ही गणपति विसर्जन की तैयारियां शुरू कर दी गई थी। पंडालों में दिनभर भजनों और भंडारों को दौर चलता रहा। गणपति विसर्जन के लिए वाहनों को फूलों और रंग बिरंगी लाइटों की लड़ियों से सजाया गया। वाहनों पर डीजे सिस्टम लगाए गए। शाम विधिवत पूजन के बाद श्रद्धालु गणपति की प्रतिमा के विसर्जन के लिए निकले।
शहर में जहां देखो वहां हवा में अबीर-गुलाल नजर आ रहा था। श्रद्धालु उत्साह से नाचते गाते गणपति बप्पा मोरया के जयकारों लगाते दिखे। आखिरकार वह समय आया जब श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचे। यहां श्रद्धालुओं ने घाटों पर गणपति की प्रतिमा का पूजन किया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने अगले साल फिर आने की कामना कर प्रतिमा को गंगा में विसर्जित किया। त्रिवेणी घाट, नाव घाट, लक्ष्मीनारायण घाट, गंगा लाइन आदि गंगा घाटों पर गणपति प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया।