ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती महाराज दो दिवसीय प्रवास पर शनिवार को मुनि की रेती शीशमझाड़ी स्थित दयानंद आश्रम पहुंचे। यहां महामंडलेश्वर, संत और स्थानीय लोगों ने उनका स्वागत किया गया। शाम को वह स्वामीनारायण घाट में आयोजित गंगा आरती में शामिल हुए।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा गंगा जल स्पर्श मात्र से ही सभी राग द्वेष मुक्त हो जाते हैं। गंगा जल और सामान्य जल में अंतर है। पानी के प्रछालन से शरीर की गंदगी दूर होती है, लेकिन गंगा जल मन के मैल को धोता है। उन्होंने संतों का आह्वान करते हुए कहा कि अपने व्यवहार में सरल और तरलता लाएं। राग द्वेष से दूर रहकर आदर्श प्रस्तुत करें और समाज का मार्ग दर्शन करें।
इस मौके पर महामंडलेश्वर अभिषेक चैतन्य, महंत प्रेमानंद शास्त्री, सुनील भगत, ब्रह्मचारी मुकुंदानंद, स्वामी सहजानंद, ब्रह्मचारी श्रवणानंद, डॉ. बृजेश सती, उमेश सती, अजय पांडे, मंहत रवि प्रपन्नाचार्य, सौरभ राणाकोटी, रमाबल्लभ भट्ट, प्रकाश रावत, नरेंन्द्र मैठाणी, स्वामी उत्तमानंद भक्तिकिशोर आदि शामिल थे।