अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से द होराइजन पब्लिक स्कूल जौलीग्रांट में पुलिस की पाठशाला आयोजित की गई। मुख्य वक्ता डिप्टी कमांडेंट एसडीआरएफ शांतनु परासर ने कहा कि किसी भी आपदा या हादसे के दौरान सबसे पहले मौके पर पहुंचने वाले फर्स्ट रिस्पॉन्डर ही राहत और बचाव कार्य की रीढ़ साबित होते हैं। चाहे सड़क दुर्घटना हो, बाढ़, भूकंप, आगजनी या अन्य प्राकृतिक आपदा, शुरुआती कुछ मिनट बेहद महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे समय में पुलिस, फायर सर्विस, एसडीआरएफ, स्वास्थ्य विभाग, स्थानीय स्वयंसेवी और प्रशिक्षित नागरिक मिलकर लोगों की जान बचाने में अहम भूमिका निभाते हैं।मंगलवार को कार्यक्रम का शुभारंभ डिप्टी कमांडेंट शांतनु परासर, विद्यालय निदेशक कै. एके शर्मा, प्रधानाचार्य नम्रता शर्मा ने किया। शांतनु परासर ने कहा कि आपदा के दौरान घायलों को समय पर प्राथमिक उपचार और सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना सबसे बड़ी चुनौती होती है। उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में फर्स्ट रिस्पॉन्डर की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण मानी जाती है। पहाड़ी क्षेत्रों में अक्सर सड़क बाधित होने और संचार व्यवस्था प्रभावित होने से शुरुआती राहत कार्य स्थानीय टीमों और ग्रामीणों के भरोसे ही चलता है। अधिक से अधिक लोगों को प्राथमिक उपचार, खोज, बचाव और आपदा प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया जाना जरूरी है। इस दौरान एसडीआरएफ ने बच्चों को सीपीआर, रोप रेस्क्यू आदि का प्रशिक्षण दिया।