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परीक्षाएं सिर पर, छात्र छात्राओं को पढ़ने के लिए नहीं मिल रही पुस्तकें

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राजकीय महाविद्यालय में जल्द ही सेमेस्टर की परीक्षाएं होने वाली हैं। कॉलेज में छात्र छात्राओं का एक वर्ग ऐसा भी है जो पुस्तकालय से किताबें लेकर पढ़ाई करता है। लेकिन पुस्तकालय से एक दिन में केवल 30 छात्र-छात्राओं को पढ़ने के लिए किताबें दी जा रही हैं। जिससे बड़ी संख्या में छात्र-छात्राओं किताबें नहीं मिल पा रही हैं।
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पंडित ललित मोहन शर्मा श्री देव सुमन विश्वविद्यालय ऋषिकेश का एक मात्र महाविद्यालय है। इस महाविद्यालय में टिहरी, पौड़ी आदि जनपदों के कई छात्र अध्ययनरत हैं। वर्ष 2019 में महाविद्यालय का विलय श्री देव सुमन विश्वविद्यालय में हुआ था। महाविद्यालय को विश्वविद्यालय का दर्जा तो प्राप्त हो गया। लेकिन यहां अध्ययनरत छात्रों को विश्वविद्यालय का लाभ नहीं मिल रहा है। छात्रों की सुविधा के लिए महाविद्यालय परिसर में लाखों की लागत से पुस्तकालय भवन बना हुआ है। इस भवन के अंदर कला, वाणिज्य और विज्ञान वर्ग के पाठ्यक्रम की करीब 70 से 80 हजार किताबें उपलब्ध हैं। भवन में 40 से 50 कुर्सियों का एक अध्ययन कक्ष भी बना हुआ है, जो बंद पड़ा हुआ है। इस पुस्तकालय को संभालने के लिए यहां मात्र एक महिला कर्मचारी तैनात है। नतीजन कला, वाणिज्य, विज्ञान वर्ग के छात्रों को समय पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो पा रही है।
महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्रों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि सितंबर से सेमेस्टर परीक्षाएं शुरू होने वाली हैं, लेकिन महाविद्यालय में छात्रों का समय पर पुस्तकें उपलब्ध नहीं हो रही हैं। पुस्तकालय भवन में जाते ही महिला कर्मचारी छात्रों को कई बहाने बनाकर टालमटोल कर देती है। जिसका असर छात्रों की पढ़ाई पर पढ़ रहा है। इस बारे में छात्रों ने कई बार महाविद्यालय के प्राचार्य से लिखित और मौखिक रूप से शिकायत भी की है। उसके बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है।
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महाविद्यालय में चल रहे सात शिक्षक
महाविद्यालय में कला, वाणिज्य और विज्ञान संकाय के लिए कुल 70 शिक्षकों का पद सृजित हैं। लेकिन अभी महाविद्यालय में 63 शिक्षक कार्यरत हैं। सात शिक्षकों के पद अभी भी रिक्त चल रहे हैं। इसके अलावा महाविद्यालय में 31 चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के पद सृजित हैं। लेकिन महाविद्यालय में अभी मात्र दो चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी कार्यरत हैं। 29 पद अभी भी रिक्त चल रहे हैं।
महाविद्यालय कर्मचारियों की कमी से जूझ रहा है। इसके लिए विश्वविद्यालय की ओर से विज्ञप्ति जारी करने की प्रक्रिया भी चल रही है। जल्द ही समस्या का समाधान किया जाएगा।
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डॉ. गुलशन कुमार ढींगरा, प्राचार्य।
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