हरित अवसंरचना के विषय पर आधारित तीन दिवसीय कार्यशाला के तहत विभिन्न राज्यों से आए अभियंताओं ने राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज का भ्रमण किया। मोतीचूर से लेकर कांसरों के बीच रेलवे ट्रैक पर बने वन्यजीव गलियारों का भ्रमण कर पार्क अधिकारियों से जानकारी ली। अभियंताओं ने मानव वन्यजीव संघर्ष को समझने का भी प्रयास किया।
भारतीय वनसेवा अधिकारी अनिरुद्ध पाठक ने बताया कि भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा ‘वानिकी प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण’ योजना के तहत यह कार्यक्रम आयोजित किया गया है। केंद्रीय अकादमी, राज्य वन सेवा, देहरादून में “हरित अवसंरचना” विषय पर 21 से 23 फरवरी तक तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और मध्य प्रदेश सहित पीसीबी, सीसीयू, लोकनिर्माण विभाग, एनएचआई विभागों से संबंधित 27 इंजीनियरों ने हिस्सा लिया।
उन्होंने बताया कि रेलवे और हाईवे पर वन्यजीव गलियारों को लेकर किए गए प्रयास बेहतर हैं। टीम ने रेलवे और सड़क दोनों का भ्रमण किया। उन्होंने बताया कि हाईवे के मुकाबले रेलवे की संरचना बहुत पुरानी हो चुकी है और उसे विकसित करने में काफी समय भी लगेगा लेकिन भविष्य में रेलवे की संरचनाओं को विकसित करने से वन्यजीवों को और सुरक्षित किया जा सकता है। जिससे मानव वन्यजीव संघर्ष में भी काफी मदद मिलेगी।