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Iमीटर न लगाने से सरकार को राजस्व का नुकसानI
शहर और आसपास के क्षेत्रों के होटल, अपार्टमेंट, आश्रमों, जंगल कैंपों और अन्य संस्थानों में डीजी सेट (डीजल जनरेटर) लगाए जा रहे हैं। डीजी सेट लगाने के लिए न तो विद्युत सुरक्षा विभाग से अनुमति ली जा रही है न ही डीजी सेट पर मीटर लगाया जा रहा है। ऐसे में डीजी सेट से उत्पादित बिजली का शुल्क जमा नहीं हो पा रहा है। जिससे सरकार को राजस्व की हानि हो रही है।
नियमानुसार डीजी सेट लगाने के लिए विद्युत सुरक्षा विभाग से अनुमति लेनी पड़ती है। डीजी सेट ऐसे स्थान पर लगाना होता है जहां आम जनमानस को कोई परेशानी न हो। डीजी सेट लगाने के दौरान विद्युत सुरक्षा विभाग की ओर से प्रमाणित विद्युत मीटर लगाया जाता है। डीजी सेट से जितनी बिजली यूनिट उत्पादित होती है प्रति यूनिट दो पैसे की दर से विद्युत सुरक्षा विभाग के खाते में जमा कराना पड़ता है। लेकिन विद्युत सुरक्षा विभाग की अनदेखी से डीजी सेट लगाने वाले विभाग से मीटर नहीं लगवाते हैं। जिससे विभाग को राजस्व का नुकसान हो रहा है।
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Iअन्य जिलों में डीजी सेट को लेकर अभियान चलाया जा रहा है। वहां पर डीजी सेट लगाने के लिए मान्यता दी जा रही है। साथ ही डीजी सेट पर मीटर लगवाया जा रहा है। ऋषिकेश और आसपास के क्षेत्रों में भी डीजी सेट लगाने के अनुमति देने और मीटर लगाने के लिए अभियान चलाया जाएगा। - गिरीश चंद पांडेय, निदेशक विद्युत सुरक्षा विभाग निदेशालय हल्द्वानीI