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Rishikesh News: भू-जल स्तर घटने से 34 वर्ष पुराने नलकूप पर मंडराया संकट

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नगर पालिका के वार्ड-पांच अपर जौलीग्रांट स्थित करीब 34 साल पुराने नलकूप ने घटते जल स्तर के कारण जवाब दे दिया है। इससे क्षेत्र में जल संकट गहराने लगा है। सभासद ने जल संस्थान ने नया नलकूप लगाने को की मांग की है। इस संबंध में जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को ज्ञापन दिया गया है।
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अपर जौलीग्रांट में गांव की हजारों आबादी के लिए 1988 में पेयजल विभाग ने नलकूप लगाया गया था। जो अब घटते भूजल स्तर के कारण जवाब दे रहा है। इसमें पानी 700 एलपीएम (लीटर प्रति मिनट) से घटकर 300 तक पहुंच गया है। इससे हजारों की आबादी पर इसका असर पड़ना तय है। दो नंबर नलकूप से कोठारी मोहल्ला, अपर जौलीग्रांट, बिचली जौलीग्रांट, पाल मोहल्ला, जौलीग्रांट अस्पताल आदि को पेयजल की आपूर्ति की जाती है। जिससे इन क्षेत्रों में पेयजल की समस्या गहरा गई है। फिलहाल वैकल्पिक व्यवस्था के लिए पास में ही स्थित एक नंबर पेयजल नलकूप से लोगों को पानी की आपूर्ति की जा रही है।

सभासद संगीता डोभाल ने कहा कि नलकूप में पहले छह इंच तक पानी आता था। लेकिन अब मात्र डेढ़ इंच पानी आ रहा है। फिलहाल जल संस्थान इस नलकूप में कंप्रेशर चलाने जा रहा है। इससे यदि जमीन के अंदर पानी के स्रोत बंद हुए होंगे तो वो खुल जाएंगे। यदि फिर भी पानी नहीं बढा। तो नया नलकूप खोदे जाने पर विचार किया जाएगा।
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बारिश कम, भू-जल का दोहन अधिक

जौलीग्रांट के आसपास सौंग और जाखन नदी बहती हैं। इसके बावजूद कभी सिंचाई व पेयजल के लिए इन नदियों के पानी के इस्तेमाल के लिए ठोस पहल नहीं की गई। वर्तमान में अपर जौलीग्रांट में पेयजल व सिंचाई के कुल छह नलकूप लगे हैं। पास में ही एसडीआरएफ, एयरपोर्ट आदि के नलकूपों की संख्या अलग है। साफ है कि भूजल दोहन अधिक और कम बारिश के कारण सभी नलकूपों में पानी कम होने लगा है।






- अपर जौलीग्रांट में पेयजल नलकूप संख्या दो में पानी 700 एलपीएम से घटकर 300 तक रह गया है। इसका कारण बारिश की कमी व भूजल दोहन है। कंप्रेशर चलाकर देखा जाएगा। यदि फिर भी पानी नहीं बढ़ा तो नया नलकूप खोदा जाएगा।
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- विनोद असवाल, जेई, जल संस्थान
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