जालसाजी कर फर्जी ई-रवन्ने तैयार कर पुलिस और खनन विभाग की आंखों में धूल झोंककर बड़े पैमाने पर अवैध खनन को अंजाम देने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने इस मामले में चार आरोपियों को दबोचा है, उनके पास फर्जी रवन्ने बनाने में प्रयुक्त लैपटाप, कंप्यूटर, प्रिंटर और कई फर्जी रवन्ने बरामद किए हैं।
कोतवाली पुलिस को अवैध खनन को रोकने की मुहिम में बृहस्पतिवार को बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने फर्जी ई-रवन्नों को तैयार कर भारी पैमाने पर संगठित होकर अवैध खनन को अंजाम देने वाले गिरोह को माजरीग्रांट के एक कमरे में दबिश देकर पकड़ा है।
पुलिस ने बताया कि कई दिनों से सूचना मिल रही थी कि डोईवाला क्षेत्र से अवैध खनन सामग्री की आवाजाही योजनाबद्ध तरीके से की जा रही है। इसको लेकर पुलिस छानबीन में जुटी थी। कोतवाल राजेश शाह ने बताया कि फर्जीवाड़े में जसपाल पुत्र मिठ्ठू राम निवासी भाड़ी, सोहना, फतेहाबाद, हरियाणा, सुमन सिंह पुत्र मनोज सिंह निवासी तहसील तारापुर, हरपुर, मुंगेर, बिहार, जितेंद्र चौधरी उर्फ शुभम पुत्र चौधरी मदनगोपाल निवासी चंद्रनगर, त्यागी रोड, दून और सुशील चौधरी उर्फ अजीत चौधरी पुत्र सुखपाल निवासी गुलशनी, बैलूनी बागपत, उप्र को गिरफ्तार किया है।
गिरोह का सरगना सतेंद्र चौधरी फरार है। 15 जनवरी को पुलिस ने अवैध खनन में एक ट्रक पकड़ा था। जांच में खुलासा हुआ कि अवैध खनन में सीज हुए एक ट्रक का रवन्ना फर्जी है। ट्रक दिनेश कुमार बरौला नोएडा उत्तर प्रदेश का था। वाहन स्वामी ने ट्रक लीज पर जीतेंद्र ऊर्फ शुभम चौधरी को दिया था।
वाहन स्वामी जब वाहन को रिलीज कराने गया तो खनन विभाग ने रवन्ना फर्जी पाया। पुलिस द्वारा रवन्ना की जांच वन विकास निगम और अन्य विशेषज्ञों को दिखाया गया तो जानकारी हुई कि उक्त रवन्ना अंकित तिथि पर जारी हुआ ही नहीं।
पुलिस ने बताया कि फर्जी रवन्ने की जालसाजी में क्षेत्र के दो स्टोनक्रेशरों की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है। पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की जा रही है। आरोप पुष्ट होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।