ब्यूरो/अमर उजाला, ऋषिकेश। 12 अक्तूबर 2016 को कपड़ा व्यावसायी बालकृष्ण अरोड़ा की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत की गुत्थी आज तक नहीं खुल पाई है। पीड़ित पक्ष कोतवाली और पुलिस महकमे के आला अधिकारियों के चक्कर काटकर थक चुका है। पीड़ित परिवार में पुलिस की कार्यशैली के प्रति निराशा इस कदर है कि घटना का जिक्र करते ही वह निराश हो जाते हैं।
गौरतलब है कि 64 वर्षीय बालकृष्ण की 2016 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हुई थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताया गया कि जहरीला पदार्थ खाने की वजह से मौत हुई। मामले में मृतक के परिजनों ने पांच के खिलाफ नामजद हत्या का केस दर्ज करवाया गया। 13 अक्तूबर 2016 को दर्ज हुए मुकदमे में रवि मनचंदा (बालकृष्ण अरोड़ा के दामाद), विजय लक्ष्मी, हरिकृष्ण, रेखा मनचंदा, रेणू मनचंदा निवासी ज्वालापुर, हरिद्वार का नाम दर्ज कराया गया।
बताते चलें कि बालकृष्ण अरोड़ा की बेटी और दामाद रवि मनचंदा के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी का फायदा उठाते हुए साधु वेशधारी ने सारे संकट का समाधान करने का भरोसा दिलाया। हर जगह से हारे बालकृष्ण ने साधु की बात पर विश्वास कर लिया। इसके बाद संदिग्ध व्यक्ति जैसा बताता रहा वैसा बालकृष्ण करते रहे।
प्रसाद खाया और हमेशा के लिए सो गए बालकृष्ण
ऋषिकेश। तथाकथित साधु ने बालकृष्ण को भरोसे में लेने के बाद प्रसाद ग्रहण करने को राजी कर लिया। इस क्रम में तरल पदार्थ भरी एक सीसी बालकृष्ण को थमाई। रात करीब साढ़े 10 बजे प्रसाद खाने के बाद सो जाने को कहा। रणनीति के तहत बाबा ने बताए समय पर बालकृष्ण को फोन किया। फोन लाइन पर रहते हुए ही बालकृष्ण को प्रसाद ग्रहण करने का निर्देश दिया और भरोसा होने के बाद फोन काट दिया। अचानक रात में बालकृष्ण की तबियत खराब हुई और उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया।
साजिशों के आगे सरेंडर हुई पुलिस
ऋषिकेश। बाल कृष्ण की मौत को करीब साढ़े तीन साल बीत चुके हैं। पीड़ित पक्ष की ओर से तथाकथित साधु का सीसीटीवी फुटेज भी उपलब्ध कराया जा चुका है। खास बात यह है कि मुख्य आरोपी रवि मनचंदा का पुलिस आज तक सुराग नहीं लगा पाई है। हैरानी वाली बात ये भी है कि आरोपी के परिजनों से भी अब तक कोई गंभीर पूछताछ नही हो पाई है।