राजकीय पशु चिकित्सालय मोहनचट्टी भवन की दीवारों में आई दरारें, दहशत में कर्मचारी
यमकेश्वर ब्लॉक के अंतर्गत राजकीय पशु चिकित्सालय मोहनचट्टी का भवन चार साल में ही जर्जर हो गया है। भवन की दीवारों में दरारें आ गई हैं। बरसात में भवन की छत भी टपकने लगी है। छत से गिरने वाले पानी को कक्षों में फैलने से रोकने के लिए कर्मचारियों को बर्तन लगाने पड़ रहे हैं। कर्मचारियों को बारिश के सीजन में भवन के गिरने का खतरा भी सता रहा है।
लक्ष्मण झूला से मात्र 15 किमी दूर सिलोगी मोटर मार्ग पर मोहनचट्टी है। यमकेश्वर ब्लॉक के करीब तीन दर्जन से अधिक गांव के ग्रामीणों के जानवरों के इलाज के लिए यहां राजकीय पशु चिकित्सालय बनाया गया है। करीब चार वर्ष पहले पशुपालन विभाग पौड़ी की ओर से लाखों रुपये की लागत से अस्पताल के नए भवन का निर्माण किया है। लेकिन भवन जर्जर हो गया है। भवन की दीवारों पर दरारें आ गई हैं। अब बारिश में भवन की छत टपक रही है। मूसलाधार बारिश होने पर छत से टपकने वाले पानी को कक्षों में फैलने से रोकने के लिए बर्तन लगाने पड़ रहे हैं। बर्तन कुछ ही देर में पानी से भर रहे हैं। कर्मचारी बार-बार बर्तनों को खाली करने में लगे हैं।
स्थानीय नागरिक अरुण जुगलान ने आरोप लगाया कि भवन निर्माण के दौरान घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया। जिसके कारण महज चार वर्षों में ही भवन जर्जर हाल में पहुंच गया है। तेज बारिश के कारण अस्पताल में तैनात स्वास्थ्य कर्मचारी सहम जाते हैं। कर्मचारियों का कहना है कि दहशत में ड्यूटी करने को मजबूर हैं।
- मामला संज्ञान में नहीं है। यदि ऐसा है तो इसकी विभागीय अधिकारियों से रिपोर्ट ली जाएगी। उसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी। - देवेंद्र बिष्ट, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी पौड़ी