लक्ष्मणझूला, मुनि की रेती, तपोवन, स्वर्गाश्रम आदि क्षेत्र देश,-विदेश में राफ्टिंग के लिए विख्यात हैं। बड़ी संख्या में पर्यटक यहां राफ्टिंग करने के लिए पहुंचते हैं। राफ्ट व्यवसायी पर्यटकों के मौज मस्ती के साथ इनकी सुरक्षा का ध्यान नहीं रखते हैं। अधिक मुनाफा कमाने की फेर में अधिकतर राफ्ट व्यवसायी सेफ्टी क्याक को संचालित नहीं करते हैं। गंगा नदी राफ्टिंग प्रबंधन समिति उदासीन बना हुआ है।
पर्यटकों की सुरक्षा दृष्टिगत गंगा में एक राफ्ट के साथ एक सेफ्टी क्याक अनिवार्य है। यह सेफ्टी क्याक इसलिए जरूरी होती है कि इस क्याक का संचालन भी कुशल गाइड ही करता है। वह राफ्ट के साथ-साथ चलता है। यदि राफ्ट गंगा की लहरों में पलट जाए तो राफ्ट का गाइड और क्याक का गाइड आसानी से पर्यटकों का रेस्क्यू कर सकते हैं।
इसके लिए राफ्ट व्यवसायी को एक क्याक गाइड को एक चक्कर के लिए एक हजार से 1500 रुपये भुगतान करना पड़ता है। सुबह से लेकर शाम तक एक राफ्ट व्यवसायी दो से तीन चक्कर मारते हैं। अधिक मुनाफा कमाने की फेर में 95 प्रतिशत राफ्ट व्यवसायी सेफ्टी क्याक को संचालित नहीं करते हैं।
मौसम परिवर्तन होते ही मार्च महीने से क्षेत्र में राफ्टिंग के शौकीनों की भीड़ बढ़ेगी। अभी की बात करें तो ब्रह्मपुरी, क्लब हाउस, शिवपुरी रााफ्टिंग स्थलों से रोजाना 250 से 300 पर्यटक राफ्टिंग का आनंद ले रहे हैं।
Iएक साल में राफ्टिंग के दौरान चार पर्यटक गवां चुके जानI
राफ्टिंग के दौरान रैपिड में राफ्ट पलटने से एक वर्ष में चार पर्यटक जान गवां चुके हैं। इनमें बीते 11 अक्तूबर 2022 में कोलकाता का 62 वर्षीय पर्यटक, 11 मार्च 2023 को हरियाणा की 28 वर्षीय युवती, 7 अप्रैल 2023 को राजस्थान के 34 वर्षीय पर्यटक और 17 दिसंबर को कर्नाटक का 36 वर्षीय युवक शामिल हैं।
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Iगंगा नदी राफ्टिंग प्रबंधन समिति की टीम समय-समय पर इस ओर अभियान चलाती है। अनियमितता मिलने पर संबंधित राफ्टिंग व्यवसायी के खिलाफ चालानी कार्रवाई की जाती है। - खुशाल सिंह नेगी, जिला साहसिक पर्यटन अधिकारी टिहरीI