चक्रव्यूह के अंदर प्रवेश करने के लिए जाते अभिमन्यू: संवाद
अठूरवाला सांस्कृतिक मंच और उत्सव ग्रुप की ओर से कोटी इंटर कॉलेज में आयोजित चक्रव्यूह मंचन ने दर्शकों के दिलों को झकझोर कर रख दिया। जब 16 वर्ष का वीर अभिमन्यु शौर्य के साथ छह द्वार तोड़कर अंतिम पड़ाव पर पहुंचा और छल से उसका वध किया गया, तो रणभूमि का वह दृश्य जीवंत हो उठा। अभिमन्यु के बलिदान को देख पंडाल में बैठे हर दर्शक की आंखें नम हो गईं।चक्रव्यूह मंचन में दिखाया गया कि कुरुक्षेत्रकी रणभूमि में जब युद्ध हुआ तो 13वें दिन कौरवों ने पांडवों को हराने के लिए द्रोणाचार्य द्वारा सात द्वारों वाले चक्रव्यूह की रचना की। इस चक्रव्यूह को भेदना श्रीकृष्ण, अर्जुन, द्रोणाचार्य और प्रद्युम्न जानते थे। रणनीति के तहत अर्जुन को राजा सुशर्मा के नेतृत्व में त्रिगर्त के सैनिकों (संशप्तकों) ने मुख्य युद्ध से अलग कर दिया। अभिमन्यु को अर्जुन की अनुपस्थिति में माता सुभद्रा और पत्नी उत्तरा चक्रव्यूह में जाने से रोकती हैं। लेकिन अभिमन्यु युद्ध के लिए चले जाते हैं। मंचन में दिखाया गया कि सात द्वारों पर गुरु द्रोणाचार्य, कर्ण आदि सात महारथी खड़े रहते हैं। 16 वर्ष का वीर अभिमन्यु छह द्वार तोड़ता हुआ आगे बढ़ता है। तभी दुर्योधन कहता है कि वो सब एक ही परिवार के सदस्य हैं। इसलिए लड़ाई छोड़कर गले मिलना चाहिए। छल से अभिमन्यु के कवच, हथियार आदि ले लिए जाते हैं। जिसके बाद धोखे से सभी महारथी मिलकर अभिमन्यु का वध कर देते हैं। अपने पुत्र की मृत्यु का समाचार मिलने पर अर्जुन भावुक और फिर क्रोधित होकर जयद्रथ वध का संकल्प लेते हैं। जिसके बाद चक्रव्यूह मंचन समाप्त हो जाता है। इस दौरान वहां मौजूद दर्शकों की आंखें छलक जाती हैं। बृजभूषण गैरोला ने कहा कि चक्रव्यूह मंचन अपने गौरवमयी इतिहास को आगे बढ़ाने का प्रयास है। रूचि भट्ट, राजेंद्र तड़ियाल, शुरवीर सिंह सजवाण, अश्विनी बहुगुणा, राजेश भट्ट आदि मौजूद रहे।