ऋषिकेश। मुनि की रेती में स्वामीनारायण घाट पर आयोजित पांच दिवसीय महा योग ध्यान कुंभ के तीसरे तीन पूर्णिमा के अवसर पर योग, ध्यान और संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। सुबह की सत्र में योग प्रशिक्षक सामंत के निर्देशन में सूक्ष्म व्यायाम, ताड़ासन और विभिन्न प्राणायामों के साथ हुई। इसके बाद वरिष्ठ पिरामिड मास्टर कविता चड्ढ़ा ने गंगा तट पर पितामह सुभाष पत्री की ओर से प्रचारित आनापानसती ध्यान का अभ्यास कराया। जिसमें श्वास के प्रति सजगता पर जोर दिया गया। दिन के संगीत ध्यान सत्र में वायलिन, बांसुरी, सितार, मृदंगम और तबले जैसे भारतीय वाद्ययंत्रों की मधुर धुनों के बीच साधकों ने साधना की। विशेष सत्र में तेलंगाना के कड़ताल में लगभग 70 एकड़ क्षेत्र में बन रहे महेश्वरा महापिरामिड और स्टैच्यू ऑफ मेडिटेशन को वर्ष 2030 तक वैश्विक ध्यान केंद्र के रूप में विकसित करने की जानकारी दी गई। महोत्सव में बच्चों और युवाओं के लिए जाग्रत किड्स और स्वानुभव यूथ कार्यशालाएं आयोजित करने के साथ ही विश्व शांति के लिए 108 घंटे के अखंड सामूहिक ध्यान को भी शामिल किया गया।