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Rishikesh News: खनन होने से 40 हजार बीघा सिंचित जमीन पर पड़ेगा प्रभाव

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किसानों की मानें तो सौंग नदी में खनन से क्षेत्र की अनुमानित 40 हजार बीघा सिंचित भूमि पर प्रभाव पड़ेगा। इस भूमि के लिए नदी स्रोत के अलावा सिंचाई के साधन सिमित होने के कारण किसान स्वयं को असहज महसूस कर रहे हैं। वन विकास निगम के स्वीकृत खनन लॉट बक्सरवाला और कालूवाला में खनन पर ग्रामीण और किसान आंदोलन का मन बना रहे हैं। बता दें कि किसान आशंकित है कि नदी में खनन कार्य का सीधा असर खेतों में सिंचाई व्यवस्था पर पड़ेगा। कालूवाला जौली नहर से लेकर बक्सरवाला अल्लाहरखी नहर के हेड तक दो किमी क्षेत्र में सालभर पानी रहता है। यह क्षेत्र की पांच बड़ी नहरों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी मुहैया कराता है। किसानों का कहना है कि खनन से नदी का तल नीचा हो जाएगा। इससे सिंचाई नहर में पानी पहुंचने में दिक्कत होगी। इसका सीधा असर अनुमानित 40 हजार बीघा जमीन की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ेगा। किसान आशंकित हो रहे हैं कि यदि सिंचाई व्यवस्था ध्वस्त हो गई तो समूचे क्षेत्र की कृषि बरबाद हो सकती है। सौंग नदी बक्सरवाला और कालूवाला में खनन होने से सिंचाई की समस्या आनी तय है। पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष डबल सिंह भंडारी कहते हैं कि यदि शासन-प्रशासन ने किसानों और ग्रामीणों की आवाज नहीं सुनी तो न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
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