पिथौरागढ़। देहरादून में आयोजित वैश्विक निवेशक सम्मेलन में स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया। इससे सीमांत की महिलाओं के हौंसले भी बुलंद हैं। यहां राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बने 4500 समूहों से 40 हजार महिलाएं जुड़ी हैं जो विभिन्न उत्पाद तैयार कर रही हैं।
जिले के आठों विकास खंडों में महिलाओं को आजीविका से जोड़ने के लिए स्वयं सहायता समूह बनाए गए हैं। चार साल पूर्व तक यहां करीब एक हजार समूह निष्क्रिय हो गए थे। सभी समूहों का एक जिला स्तरीय फेडरेशन तैयार किया। स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भरोसा दिलाया गया कि उनके उत्पादों को बाजार मुहैया कराया जाएगा। इसके बाद निष्क्रिय समूह फिर सक्रिय हो गए।
फेडरेशन की अध्यक्ष रेखा भट्ट का कहना है कि महिलाएं पहाड़ी उत्पाद गहत, राजमा, भट, मसूर, लाल चावल, हल्दी, अदरक, मसाले से लेकर बड़ी, मडुवे के बिस्किट, ऐपन, डेयरी उत्पाद, रिंगाल और ऊन के उत्पाद, जूस, घी आदि तैयार कर रही हैं। इन उत्पादों का विपणन सरस बाजार में किया जा रहा है। देहरादून और दिल्ली में लगने वाले सरस बाजार में यहां के उत्पादों की अच्छी मांग रहती हैं। फेडरेशन गढ़वाल से झिंगोरा, जखिया, जंबू, गंदरायण मंगाता है और उन्हें मुनस्यारी का राजमा भेजता है।
अध्यक्ष भट्ट का कहना है फेडरेशन से जुड़ी महिलाएं घरेलू कार्य के साथ आजीविका संवर्द्धन में भी जुटी हुई हैं। उन्होंने बताया कि पिछले चार साल में फेडरेशन के माध्यम से 40 लाख रुपये की बिक्री की गई है। उन्होंने बताया कि सरकार के लोकल फॉर वोकल नारे से लोग पहाड़ी उत्पादों की ओर आकर्षित हुए हैं। फेडरेशन को दो साल में 3.50 लाख रुपये का फायदा हुआ है। यह धनराशि रिवाल्विंग फंड में है। समूह को जरूरत पड़ने पर इस धनराशि से उनकी मदद की जाएगी।
कोट:
जिला स्तरीय फेडरेशन से जुड़ी महिलाएं आय सृजन का कार्य कर रही हैं। स्थानीय उत्पादों का सरस बाजार के माध्यम से विपणन किया जा रहा है। महिलाओं की आजीविका बढ़ाने के लिए सरकारी स्तर पर हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
- आशीष पुनेठा, परियोजना अधिकारी डीआरडीए, पिथौरागढ़।