पिथौरागढ़। अपने पशुओं के चारागाह को बचाने, धारे-नौले को बचाने के लिए महिलाओं ने जंगलों को आग से बचाने की मुहिम शुरू की है। उनका कहना है कि वे अपने गांव के जानवरों को भूखे मरते नहीं देखना चाहतीं। गर्मी में धारे-नौले को पानी से लबालब देखना चाहती हैं। इसके लिए वह हर वह उपाय कर रही हैं जिससे उनके गांव के जंगल में आग न लग सके।
गुरना बीट के इन दो गांवों की महिलाएं सुबह अपना काम करने के बाद दिन में वनाग्नि की रोकथाम में जुट रही हैं। वह जंगलों में फैली सूखी घास को एकत्र कर उसका निस्तारण कर रही हैं जिससे वनों में आग न फैले। वह अपने नाप खेतों में एकत्र होकर पराली को जला रही हैं। लोगों को जागरूक करने के साथ ही वन पंचायत में बने रास्तों पर पिरुल की सफाई, फायर लाइन बनाने आदि काम में वन विभाग को सहयोग भी कर रहीं हैं।
चिंता
महिलाओं का कहना है कि आग लगने से उनके चारागाह वाले स्थान खत्म हो जाएगी। धारे-नौले सूख जाएंगे। इससे गांव के जानवर भूखे मर जाएंगे। गर्मी में धारे-नौले उनके लिए जल आपूर्ति भी करते हैं। ऐसे में हमें मिलकर जंगलों को बचाना होगा।
महिलाओं की मुहिम की सराहना की जानी चाहिए। अगर हर कोई इस तरह से जागरूक होगा तो जंगलों में आग की घटनाएं कम हो जाएंगी।
-जीवन मोहन दगाड़े, डीएफओ
क्षेत्र में वनाग्नि की रोकथाम पहले से करते आ रहे हैं। यह जंगल ही हमारी धरोहर हैं। सभी महिलाएं सुबह एक स्थान पर एकत्र होती हैं, उसके बाद हम सभी जंगल क्षेत्र में जाकर अपना काम करते हैं। पौधों तक आग नहीं पहुंचने देते हैं। -शांति देवी, टकाड़ी।
वनाग्नि की रोकथाम हम पहले अपने नाम खेत से शुरू करते हैं। यह सभी के सामूहिक प्रयास से किया जा रहा है। कंटीली झाड़ियों में आग लगाने पर उसके बुझने तक निगरानी की जा रही है, ताकि अन्य वन्य संपदा को नुकसान न पहुंचे। -विमला कुंवर, टकाड़ी।