पिथौरागढ़। जनवरी बीतने को है अभी तक पिथौरागढ़ उद्यान विभाग में शीतकालीन पौधों का आवंटन नहीं हो पाया है। काश्तकारों का कहना है कि इस बार बारिश और बर्फबारी नहीं होने से शीतकालीन पौधों को नुकसान पहुंचा है। फरवरी के बाद तापमान बढ़ने लगेगा। ऐसे में पौधे देरी से लगाने से कोई फायदा नहीं होगा।
पिथौरागढ़ जिले में शीतकाल में 43679 पौधे लगाए जाने हैं। इसमें 37400 पौधे काश्तकारों को निशुल्क उपलब्ध कराए जाने हैं। मुख्यमंत्री बागवानी विकास योजना के तहत 750 विभागीय योजना के तहत 727 और बागवानी मिशन योजना के तहत 4802 पौधे लगाए जाने हैं। उद्यान विभाग ने शीतकाल में आड़ू की रेडजून, नैक्टैन, तोतापरी, पैराडिलक्स और अलकजेंडर प्रजाति के पौधों का रोपण करना है। इसके अलावा प्लम की न्यू प्लम और ब्लैक अंबर, खुबानी की चौबटिया मधु, नाशपाती की कल्मी रेड बर्टलेट पौधों का रोपण किया जाना है।
सेब की रेड डेलिसस और गेलगाला, कीवी की कल्मी और अखरोट की कागजी और कल्मी अखरोट के पौधों का रोपण किया जाना है। उद्यान विभाग ने पौधों की मांग शीतकाल शुरू होने से पूर्व भेज दी थी, लेकिन अभी तक विभाग को पौधों का आवंटन नहीं हो पाया है। काश्तकारों का कहना है कि देरी से पौधे मिलेंगे तो पौधे ग्रोथ नहीं कर पाएंगे क्योंकि इस बार बारिश और बर्फबारी नहीं हुई है।
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पिथौरागढ़ में होता है सेब का उत्पादन
पिथौरागढ़। पिथौरागढ़ जिले के ह्यूपानी, डुंगरी, कुटी और मुनस्यारी में सेब का उत्पादन होता है। ह्यूपानी में काश्तकार मनोज खड़ायत ने खुद के प्रयासों से सेब का बाग तैयार किया है। उनकी ओर से उत्पादित सेब देश विदेश को जाते हैं। उनका कहना है कि यदि काश्तकारों को प्रोत्साहित किया जाए तो सीमांत जिले में सेब का उत्पादन काफी बढ़ेगा। इसके अलावा उद्यान विभाग को उन्हीं प्रजाति के सेब के पौधों का वितरण किया जाना चाहिए जो इस वातावरण में बढ़ सकें। साथ ही काश्तकारों के बागानों का निरीक्षण कर पौधे बांटने चाहिए। संवाद
इतने शीतकालीन पौधों की भेजी है मांग
आड़ू- 7796
प्लम-5212
खुबानी-3936
नाशपाती-5000
सेब-7508
कीवी-10727
अखरोट- 3500
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इनसेट कोट-
शीतकालीन पौधों का अभी आवंटन नहीं हो पाया है। जैसे ही विभाग को पौधे मिलेंगे पौधों का वितरण शुरू कर दिया जाएगा।
फोटो विवरण- 24पीटीएच17पी- त्रिलोकी राय, डीएचओ पिथौरागढ़।