पिथौरागढ़। सीमांत जिले पिथौरागढ़ में आठूं पर्व की धूम मची है। पिथौरागढ़ रामलीला मैदान में आठूं पर्व पर महेश्वर की मूर्ति की स्थापना के बाद महिलाओं ने अठवाली पूजा की। उन्होंने गौरा और महेश्वर से क्षेत्र में सुख शांति और अच्छी खेती और खुशहाली की कामना की। इसके बाद विभिन्न स्कूलों की छात्राओं और महिलाओं ने पारंपरिक परिधानों से सजकर नगर में गौरा-महेश्वर की भव्य झांकी निकाली।
बृहस्पतिवार को पिथौरागढ़ रामलीला मैदान से विभिन्न स्कूलों की छात्राओं और महिलाओं ने गौरा- महेश्वर की भव्य झांकी निकाली। इस दौरान महिलाओं ने कां रे उपज्या महेसर गुसायां, कां रे उपजी ललि गमारा का गायन किया। महिलाओं और छात्राओं की एक किलोमीटर लंबी झांकी आकर्षण का केंद्र रही। जिन-जिन स्थानों से झांकी निकाली गई वहां घरों की छतों से लोगों ने फूल और चावल चढ़ाकर पूजा की। झांकी रामलीला मैदान होते हुए घंटाघर, बैंक रोड, सिल्थाम, गांधी चौक, सिमलगैर से वापस रामलीला मैदान पहुंची। इसके बाद यहां पारंपरिक तरीके से पूजा अर्चना की गई।
इसके बाद फल फटकने की रस्म मनाई गई। रामलीला प्रबंध कार्यकारिणी अध्यक्ष भूपेंद्र सिंह माहरा ने कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए सभी का आभार प्रकट किया। झांकी का नेतृत्व सरस्वती बालिका विद्या मंदिर की प्रधानाचार्य रेखा जोशी ने किया। कार्यक्रम के संचालन में हेमराज सिंह बिष्ट, प्रकाश जोशी, दिलीप वल्दिया,पंकज जुकरिया, नवीन भट्ट,जर्नादन उप्रेती, नानू बिष्ट सहित कई लोग मौजूद रहे। कनालीछीना विकासखंड के अस्कोट, गुड़ौली, मलान, बस्तड़ी सहित कई अन्य गांवों में भी सातूं-आठूं का पर्व धूमधाम के साथ मनाया गया।
सतगढ़ गांव में हिरन चीतल और महाकाली का मंचन
कनालीछीना (पिथौरागढ़)। कनालीछीना विकासखंड के सतगढ़ गांव में आठूं का पर्व पर खतेड़ा, मझेड़ा में हिलजात्रा के आयोजन के बाद मुख्य पंचकोटी देवखली सतगढ़ में महाकाली, हिरन चीतल, बैलों की जोड़ी, गल्या बल्द का मंचन किया गया। इस दौरान महिलाओं और पुरुषों ने खेल, ठुल खेल प्रस्तुत किए। इसके बाद छुरमल देवता मंदिर में मुख्य मेले का आयोजन किया गया। संवाद
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लोकपर्व हमारी पहचान
सांतू-आंठू पर्व हमारी पहचान हैं। हमें अपने पारंपरिक पर्वों को धूमधाम के साथ मनाना चाहिए। गौरा और महेश्वर की पूजा अर्चना से हर मनोकामना पूरी होती है। अच्छी बात यह है कि नई पीढ़ी लोकपर्वों के संरक्षण के लिए आगे आ रही है जो अच्छे संकेत हैं।
फोटो विवरण- 24पीटीएच 28पी- रेखा जोशी, प्रधानाचार्य सरस्वती बालिका विद्या मंदिर पिथौरागढ़।
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सदियों से ग्रामीण क्षेत्रों में गौरा-महेश्वर की पूजा अर्चना की जा रही है। गौरा-महेश्वर प्रसन्न होकर हर भक्त की मनोकामना पूरी करते हैं। हमें अपने पर्वों को हर्षोल्लास के साथ मनाना चाहिए।
विमला कापड़ी, सतगढ़ गांव।
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शिव शंकर चले कैलाश, बुंदिया गिरने लगी..
चंपावत क्षेत्र में गौरा महोत्सव की धूम
.चंपावत। क्षेत्र में गौरा महोत्सव की धूम है। महिला श्रद्धालुओं ने गौरा और महेश का पूजन किया। बृहस्पतिवार को उपवास के बाद महिलाओं ने गले में दुबड़ा धारण किया। चंपावत सहित समूचे क्षेत्र में महोत्सव के दूसरे दिन गौरा महेश की पूजा अर्चना हुई।
मल्लीहाट में जानकी बिष्ट के आवास पर पूजन के बाद महिलाओं ने गले में दुबज्योड़ पहना। महिलाओं ने शिव शंकर चले कैलाश, बुंदिया गिरने लगी... आदि भजन गाए। पुरोहित कौशल कुलेठा ने धार्मिक अनुष्ठान कराए। पुष्पा वर्मा, मीरा खर्कवाल, मंजू साह, मेनका साह, प्रियंका तिवारी, दीपा तिवारी, सरोज पांडे, भावना बिष्ट, आशा खर्कवाल आदि मौजूद रहीं।
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जिंडी, नौमना में गौरा महोत्सव की धूम.
लोहाघाट (चंपावत)। लोहाघाट और बाराकोट क्षेत्र में गौरा महोत्सव की धूम मची है। नेपाल सीमा से लगे जाख, जिंडीगांव, बसकुनी, लुपड़ा आदि गांव की महिलाओं सुबह से ही मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना कर गौरा-महेश की आराधना की। देव डांगरों ने भक्तों को आशीर्वाद दिया। पं. मदन कलौनी ने पूजा-अर्चना संपन्न कराई। गौरा महोत्सव का शुभारंभ संघ प्रचारक डीडीहाट देव कलौनी और लोहाघाट प्रचारक रमेश मुखर्जी ने किया। बाराकोट ब्लाक के नौमाना गांव में ग्राम प्रधान सुनीता जोशी के नेतृत्व में महिलाओं ने गौरा-महेश्वर के गीत गाए। वहां भागीरथ, मीना जोशी, ममता जोशी, जानकी, बसंती, पूजा, तुलसी, गीता, हेमा देवी आदि थे। संवाद