पिथौरागढ़। जिला मुख्यालय में पानी की किल्लत के चलते उपभोक्ता परेशान हैं। नगर में रोस्टर के हिसाब से एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है। लगातार आवाज बुलंद होने के बावजूद संबंधित अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंग रही है।
पिथौरागढ़ की करीब एक लाख की आबादी को पानी मुहैया कराने के लिए महत्वाकांक्षी आंवलाघाट पंपिंग पेयजल योजना बनाई गई। तब उम्मीद थी कि इस योजना से पानी की कोई किल्लत नहीं रहेगी। बावजूद इसके आज हजारों रुपये का बिल भरने के बाद भी पानी के लिए तरसना पड़ रहा है। यदि पेयजल किल्लत ऐसी ही रही तो संभवत: नई योजना बनानी पड़ेगी। निर्माण कार्य में बजट खपने के बाद उस योजना का भी आंवलाघाट की तरह ही हाल होगा।
50 साल पहले बनी घाट योजना से जहां तीन एमएलडी पानी मिल रहा है वहीं जल निगम की आंवलाघाट येाजना से महज 5.67 एमएलडी ही पानी मिल पा रहा है। ऐसे में 80 करोड़ रुपये से अधिक की इस योजना पर सवाल उठने स्वाभाविक हैं। जल निगम के अभियंता कभी फाेन उठाने की जहमत नहीं करते हैं। इसके चलते आंवलाघाट योजना के बारे में लोगों को पता नहीं चल पाता है। प्रशासन का रवैया भी इस मामले में बेहद ढीला है। बीते दिनों जिला पंचायत अध्यक्ष ने आंवलाघाट का भी दौरा किया था। वहां अब नदी को चैनलाइज करने की बात की जा रही है।
जन प्रतिनिधियों को भी पेयजल समस्या से कोई लेना देना नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थिति बदहाल है। हर घर जल योजना के तहत संयोजन तो लगा दिए हैं लेकिन पानी का अता-पता नहीं है। जल संस्थान के अधिशासी अभियंता सुरेश चंद्र जोशी का कहना है कि सभी योजनाओं से महज 7.75 एमएलडी पानी मिल रहा है। आंवलाघाट योजना से दो एमएलडी पानी की आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्र में की जा रही है। घाट योजना के लिए महज संचालन और तकनीकी कार्यों के लिए ही बजट उपलब्ध होता है।