पिथौरागढ़/नाचनी। किसानों की हाड़तोड़ मेहनत पर कभी प्रकृति तो कभी जंगली जानवरों का कहर टूट रहा है। इस साल पहले सूखे के कारण फसलों को नुकसान पहुंचा तो अब ओलों की मार से फसलें बर्बाद हो रही हैं। फसलों के साथ ही बागवानी को नुकसान पहुंचने से किसानों की चिंता बढ़ गई है।
पिथौरागढ़ जिले में 73744 किसान हैं जो लगभग 42 हजार हेक्टेयर भूमि पर खेती करते हैं। खेती किसानी की स्थिति का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि मात्र 3200 हेक्टेयर भूमि पर ही सिंचाई की सुविधा है। शेष कृषि भूमि असिंचित है। यह असिंचित क्षेत्र की खेती पूरी तरह से मौसम पर निर्भर रहती है।
इस वर्ष शीतकाल में पूरी तरह से सूखा रहा है। खेतों में बोई गई गेहूं, जौ, मसूर की खेती बारिश नहीं होने से प्रभावित हुई है। सिंचित और नमी वाले क्षेत्रों में जो फसलें उगी हैं उन पर फिर मौसम ओलावृष्टि के रूप में कहर बनकर टूट रहा है।
ओलों की मार से अब तक नाचनी, क्वीटी, सैंणराथी, गोला, होकरा, खोयम, डोर, मोडम, भैंसखाल, गटघोरगाड़ी सहित कई गांवों में फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। प्रभावित किसान प्रशासन से मुआवजे की मांग कर रहे हैं।
लीची, आम, नींबू प्रजाति के फलदार पेड़ों को भी नुकसान
पिथौरागढ़। मार्च में ओलावृष्टि के कारण फसलों के साथ ही फलदार पेड़ों को भी नुकसान पहुंचता है। इस साल जिले के घाटियों वाले क्षेत्रों में आम और लीची में अच्छी बौर आई है। इसी तरह ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नींबू प्रजाति के माल्टा, नींबू, संतरा, चूख, जामिर बहुतायत में होता है लेकिन मौसम के रुख से किसान चिंतित हैं। संवाद
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पहले सूखे के कारण खेतों में बोए गए बीज उगे ही नहीं। जो फसल उगी थी वह ओलों की मार से चौपट हो गई। ओलावृष्टि से गेहूं, जौ, मसूर की फसलों को काफी नुकसान पहुंचा है। खेतीबाड़ी से छह माह का राशन हो जाता था लेकिन ओलावृष्टि से सब चौपट हो गया है। - भीम राम, डोर गांव।
ओलावृष्टि से आम, लीची, नींबू प्रजाति के पेड़ों को नुकसान पहुंचा है। सब्जियां भी खेतों में ही बर्बाद हो गई हैं। परिवार की आजीविका चलाने में आधा सहारा मिलता है। पहले सूखा रहा अब ओलावृष्टि से नुकसान हो रहा है। -नवीन पाठक, गटघोरगाड़ी।