संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़। कोविड-19 के कहर के बाद बाहरी राज्यों से लोग बड़ी संख्या में पहाड़ों को लौट रहे हैं। रोजगार छिनने पर घर लौट रहे लोगों का कहना है कि प्रवासी शब्द उन्हें पराया होने का एहसास दिला रहा है।उनका कहना है कि वो प्रवासी नहीं हैं, बल्कि रोजगार और घर परिवार के भरण पोषण की चिंता उन्हें महानगरों को ले गई।
इन दिनों सोशल मीडिया पर महानगरों से घरों को लौट रहे लोगों का दर्द साफ झलक रहा है। लोगों का कहना है कि वो रोजगार छिनने के बाद ढाई से तीन महीने बेरोजगार रहने के बाद धक्के खाकर घरों में पहुंचे। उनका कहना है कि घर पहुंचने के बाद ग्रामीणों का व्यवहार उनको दुखी कर रहा है। कोविड के कहर के बाद ग्रामीणों का व्यवहार काफी बदल गया है। उनका व्यवहार हमें बार बार प्रवासी होने एहसास दिला रहा है। सिमलटा के प्रदीप कुमार का कहना है कि वो प्रवासी नहीं है, परिवार के भरण पोषण की चिंता उन्हें महानगरों को ले गई। सिरौली के राजेंद्र सिरौला फेसबुक में भावुक पोस्ट डालकर लिखा है कि उन्हें परिविर और गांव की चिंता है लेकिन गांव के लोग उन्हें कोविड का मरीज बोल रहे हैं।