14 साल में भी रोशन ना हो सके चीन सीमा पर बसे गांव
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चीन सीमा पर बसे गांवों को रोशन करने की योजना परवान नहीं चढ़ पाई है। 14 बाद भी पांच जल विद्युत योजनाएं धरातल पर नहीं उतर सकी हैं। उरेडा के लिए इन योजनाओं को धरातल पर उतारना चुनौती बना है और सीमा पर बसे लोग जल्द बिजली से अपने घरों को रोशन होने की उम्मीद लगाए हैं।
10 करोड़ रुपये से वर्ष 2010 में धारचूला के चीन सीमा पर बसे दारमा, व्यास घाटी के गांवों को रोशन करने के लिए सात जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण शुरू हुआ। उरेडा को इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने की जिम्मेदारी दी गई है। 14 साल बाद भी सिर्फ दुग्तू और नपलच्यू परियोजनाओं का निर्माण पूरा हो सका है। शेष पांच योजनाएं अब भी अधूरी हैं। ऐसे में चीन सीमा पर बसे गांवों को रोशन करने की योजना दम तोड़ रही है और यहां बसे लोग किसी तरह मोमबत्ती के सहारे अपने घरों में उजाला कर रहे हैं।
मौसम बन रहा है चुनौती
हर वर्ष सितंबर, अक्तूबर में इन घाटियों में बर्फबारी शुरू हो जाती है। अप्रैल तक इन घाटियों को जोड़ने वाले रास्ते बर्फ से पट जाते हैं। मई-जून से सितंबर तक मानसून काल में दरकती पहाड़ी और गिरते बोल्डरों के बीच इन घाटियों में पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं होता। ऐसे में इन परियोजनाओं को धरातल पर उतारने के लिए मौसम बड़ी चुनौती बना है।
छह महीने में योजनाओं को धरातल पर उतारने का दावा
उरेडा बीते 14 साल में इन जल विद्युत परियोजनाओं को धरातल पर नहीं उतार सका है। अब छह माह में इनका निर्माण पूरा करने का दावा कर रहा है। उरेडा के अनुसार सभी योजनाओं का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। अगले छह महीने के भीतर इन योजनाओं से चीन सीमा पर बसे गांव रोशन होंगे।
ये हैं जल विद्युत परियोजनाएं
परियोजना क्षमता (किलोवाट में) लागत (लाख में)
दुग्तू 25 109.39
सेला 50 130.84
नागलिंग 50 173.65
नपल्चू 50 173.20
कुटी 50 149.99
रांगकांग 50 202.65
बूंदी 50 150.18
सभी जल विद्युत परियोजनाओं का निर्माण कार्य लगभग पूरा हो चुका है। दो योजनाओं का संचालन शुरू कर दिया है। अन्य योजनाएं भी जल्द संचालित होंगी।
- भूपाल सिंह कुंवर, परियोजना अधिकारी, उरेडा, पिथौरागढ़।