फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pithoragarh News: ग्रामीणों ने श्रमदान से रामगंगा में बनाया अस्थायी पुल

विज्ञापन
सात दिन की कड़ी मेहनत के बाद रामगंगा नदी पर ग्रामीणों ने श्रमदान कर पुल बनाया है। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
विज्ञापन
पिथौरागढ़। जब शासन-प्रशासन ने सुध नहीं ली तो ग्रामीणों ने सात दिनों के श्रमदान से रामगंगा नदी पर अस्थायी पुल बना दिया। पुल का निर्माण पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिले के सीमावर्ती क्षेत्रों के ग्रामीणों ने मिलकर किया है। इस अस्थायी पैदल पुल से अब दोनों क्षेत्रों की लगभग साढ़े छह हजार की आबादी को फायदा मिलेगा।
विज्ञापन

रामगंगा नदी पर पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों को जोड़ने के लिए पक्का लोहे का पुल था। 11 जुलाई 2018 को बादल फटने से उफान पर आई रामगंगा के बहाव से पुल बह गया। इससे पिथौरागढ़ के नाचनी सहित चार गांवों और बागेश्वर के करीब छह गांवों का आपस में संपर्क कट गया था। सीमा पर स्थित इन गांवों का बाजार नाचनी में पड़ता है। गांवों से डेढ़ सौ से अधिक बच्चे पढ़ने के लिए पिथौरागढ़ के नाचनी आते हैं। पिथौरागढ़ प्रशासन ने आवाजाही के लिए रामगंगा पर गरारी लगाई है जिसके भारी होने से आवाजाही के लिए रस्सी खींचनी पड़ती है। अभिभावकों को प्रतिदिन दो बार रस्सी खींच कर अपने बच्चों को विद्यालय भेजना और लाना पड़ता था।
छह से दस किमी की अतिरिक्त दूरी पड़ती है भारी
बागेश्वर के ग्रामीणों को नाचनी बाजार आने के लिए छह से दस किमी का फेरा लगाना पड़ता था। इसे देखते हुए तीन वर्षों से दोनों जिलों के ग्रामीण नवंबर में नदी का जलस्तर घटने पर श्रमदान से अस्थायी पुल बनाते आ रहे हैं। यह पुल जून में नदी का जलस्तर बढ़ने से बह जाता है। इस वर्ष भी 27 नवंबर से पुल का निर्माण शुरू किया। अब लगभग 60 मीटर लंबा अस्थायी पुल तैयार हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

इन गांवों को होगा फायदा
बागेश्वर जिला: कभड़ा, कालापैर, भकुना, खेती आदि गांवों की लगभग ढाई हजार आबादी
पिथौरागढ़ जिला: नाचनी सहित चार गांवों की लगभग चार हजार की आबादी।
स्थायी पुल निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया है। इस प्रस्ताव का अब तक क्या हुआ इसे दिखवा जा रहा है।
-एफआर चौहान, अपर जिलाधिकारी, पिथौरागढ़
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें