व्यास घाटी स्थित ओल्ड लिपुपास से कैलाश दर्शन। संवाद
पिथौरागढ़। भारत सरकार और उत्तराखंड पर्यटन विकास परिषद की ओर से संचालित ओल्ड लिपुपास से तिब्बत स्थित कैलाश दर्शन के लिए यात्री एक अक्तूबर को गुंजी पहुंचेंगे। ट्रायल पर चल रही इस यात्रा में फिलहाल 60 यात्रियों को दर्शन कराए जाएंगे। यदि यात्रियों ने इसमें दिलचस्पी दिखाई तो इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
कोराना काल के बाद से ही कैलाश मानसरोवर यात्रा बंद है। अब यात्री ओल्ड लिपुपास (18300 फुट ऊंचाई) से ही कैलाश के दर्शन कर सकते हैं। यात्रा के सफल संचालन के लिए कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) ने चार बैच तय किए हैं। प्रत्येक बैच में 15 यात्री शामिल हैं। यात्री एक अक्तूबर को पिथौरागढ़ स्थित नैनीसैनी हवाई पट्टी से हेली के जरिए गुंजी पहुंचेंगे। वहां से अगले दिन यात्री आदि कैलाश के दर्शन करेंगे। तीसरे दिन यात्रियों को ओल्ड लिपुपास से कैलाश दर्शन के लिए ले जाया जाएगा। वापसी में यात्री नाभी में स्थित होम स्टे में विश्राम करेंगे।
अगले दिन गुंजी से सीधे हेली से नैनीसैनी हवाई पट्टी पर उतरेंगे। यात्रा केएमवीएन, सेना और आईटीबीपी के आपसी समन्वय से संचालित की जाएगी। धारचूला पर्यटक आवास गृह के प्रबंधक धन सिंह बिष्ट ने बताया कि निगम के प्रबंध निदेशक विनीत तोमर ने यात्रा के संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं।
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स्कार्पियो से पहुंचेंगे नाभीढांग
पिथौरागढ़। पर्यटक आवास गृह धारचूला के प्रबंधक धन सिंह बिष्ट ने बताया कि यात्री गुंजी से स्कार्पियो से नाभीढांग पहुंचेंगे। यहां भोजन के बाद वह डेढ़ सौ मीटर की पैदल दूरी तय कर ओल्ड लिपुपास से कैलाश के दर्शन करेंगे। उन्होंने बताया कि यात्रियों के कैलाश दर्शन की सभी तैयारियां कर ली गई हैं। संवाद