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अब भारत-चीन व्यापार के लिए वाहनों से तकलाकोट तक सामान ले जा सकेंगे व्यापारी

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दीपक कापड़ी (संवाद), पिथौरागढ़। चीन सीमा के लिए तवाघाट-लिपूलेख सड़क के बनने से भारत चीन व्यापार सुगम हो जाएगा। सड़क नहीं होने के कारण व्यापारी बरसात के दिनों में घोड़े और खच्चरों के माध्यम से सामान पहुंचाते थे। सड़क के बनने से अब व्यापारियों को पैदल नहीं चलना पड़ेगा। 7 बुनियादी सुविधा के अभाव में भारत-चीन व्यापार को लेकर व्यापारियों का मोह भंग हो रहा था। भारत-चीन व्यापार के लिए अंतरराष्ट्रीय मंडी गुंजी पहुंचने के लिए व्यापारियों को कई किमी पैदल चलकर सामान पहुंचाना पड़ता था। बरसात के मौसम में व्यापार शुरू होने के कारण व्यापारियों का कई सामान खराब भी हो जाता था। इससे व्यापारियों को काफी नुकसान उठाना पड़ता था। सड़क नहीं होने के कारण पहले व्यापारियों को घोड़े-खच्चरों से धारचूला से गर्बाधार तक 45 किमी वाहन से चलने के बाद सामान के साथ पैदल यात्रा शुरू करनी पड़ती थी। इसके बाद व्यापारियों को पहले गर्बाधार से मालपा 10 किमी, मालपा से बूंदी 9 किमी, बूंदी से गुंजी 18, गुंजी से कालापानी 08, कालापानी से नाभीढांग 08 किमी और नाभीढांग से तकलाकोट 25 किमी पैदल चलने के बाद सामान तकलाकोट अंतरराष्ट्रीय मंडी तक सामान पहुंचाना पड़ता था। धारचूला से लिपूलेख तक सड़क पहुंचने के बाद अब व्यापारियों को पैदल नहीं चलना पड़ेगा। चीन वर्ष 2000 में ही लीपूलेख तक सड़क पहुंचा चुका है। अब चीनी व्यापारी चीन से तकलाकोट तक 25 किमी वाहन से आकर सीधे सामान उठा सकते हैं। सड़क के पहुंचने के बाद व्यापारियों में व्यापार बढ़ने की उम्मीद हैं। वरिष्ठ ट्रेड सहायक खीमानंद भट्ट का कहना है कि सड़क के बनने से व्यापारियों को राहत मिलेगी। ---:: कोरोना के कारण भारत-चीन व्यापार के शुरू होने की उम्मीद नहीं ::- पिथौरागढ़। कोरोना वायरस के चलते इस वर्ष भारत-चीन अंतरराष्ट्रीय व्यापार में भी खतरे के बादल मडरा रहे हैं। इस वर्ष व्यापार शुरू होने की ना के बराबर उम्मीद है। एसडीएम अनिल कुमार शुक्ला का कहना है कि इस बार व्यापार नहीं हो पाएगा। वर्ष 2015 में 3261845 रुपये का आयात, 716232670 रुपये का निर्यात, वर्ष 2016 में 521556 रुपये का आयत और 197595650 का निर्यात, वर्ष 2017 में 734494 रुपये का आयात और 878546050 रुपये का निर्यात हुआ। वर्ष 2018 में 534684 रुपये का आयात और 878642560 रुपये का निर्यात हुआ। --- इन वस्तुओं का होता है व्यापार ::- गुड़, मिश्री, दन, कालीन, माचिस, एल्यूमीनियम के बर्तन, बांस के डंडे, कूट्टू का आटा, सूखी मूली सहित कई अन्य चीजों का व्यापार किया जाता है। -- :: "कोरोना वायरस के कहर के बाद भारत-चीन व्यापार के शुरू होने की उम्मीद नहीं है। सड़क के पहुंचने से व्यापारियों को सहूलियत होगी।" -अनिल कुमार शुक्ला, एसडीएम धारचूला।
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