नाचनी में रामगंगा और भुजगड़ नदी के कटाव से खतरे की जद में आया शिवालय वार्ड। संवाद
नाचनी (पिथौरागढ़) । भुजगड़ और रामगंगा के कटाव से मंदिर समूह के अलावा आबादी खतरे में आ गई है। स्थानीय जनप्रतिनिधि और जनता लगातार बाढ़ नियंत्रण के लिए सुरक्षा प्रबंध किए जाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
पूर्व ब्लॉक प्रमुख और शिव मंदिर कमेटी के अध्यक्ष कुंदन सिंह बथियाल ने बताया कि इस बार रामगंगा और भुजगड़ नदियों के कटाव से शिवालय परिसर के देवी मंदिर क्षतिग्रस्त हो गए हैं। साथ ही शनि मंदिर, संतोषी, राधाकृष्ण, भैरव, राम दरबार और शिव मंदिर पूरी तरह खतरे की जद में आ गए हैं। मंदिर परिसर से लगे दस परिवार, सरस्वती शिशु मंदिर, आयुर्वेदिक चिकित्सालय आदि भवन खतरे में हैं। शवदाह के लिए संगम तक जाने वाला मार्ग बह गया है। इसके चलते लोगों को शवदाह स्थल से सौ मीटर पहले आबादी में करना पड़ रहा है। सिंचाई विभाग धारचूला ने पांच सौ मीटर क्षेत्र में रामगंगा तटों पर बाजार की सुरक्षा के लिए सुरक्षा दीवारें तो लगाईं लेकिन शिवालय वार्ड की ओर सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं किया गया। यदि इस वर्ष दोनों नदियों के संगम तक सुरक्षा दीवार का निर्माण नहीं किया गया तो प्रभावित क्षेत्र के पूरी तरह भू कटाव की जद में आने की संभावना है।
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मंदिर की सुरक्षा के लिए हो रहा शिव महापुराण
नाचनी। क्षेत्र की जनता ने मंदिरों को नदियों की बाढ़ से बचाने के लिए नौ दिनी शिव महापुराण यज्ञ का आयोजन किया है। मंदिर की सुरक्षा के लिए मंगलवार को कथा के पारायण के बाद मंदिर कमेटी के पदाधिकारी और श्रद्धालु हस्ताक्षर अभियान चलाकर उसे मुख्यमंत्री पोर्टल में डालेंगे। संवाद