बीआरओ ने भले ही तवाघाट से चीन सीमा से लगे लिपुलेख तक सड़क पहुंचा दी है लेकिन चीन सीमा तक पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं है। सड़क निर्माण के दौरान तोड़े गए बड़े-बड़े पहाड़ पर काफी दरारें हो गई हैं जिनसे हर वक्त मलबा और पत्थर गिरने का खतरा बना है। कई स्थानों पर सड़क के संकरा होने के कारण दुर्घटनाओं का खतरा अधिक है। ऐसे में आदि कैलाश यात्रियों और अन्य पर्यटकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।
बीआरओ ने वर्ष 2020 में तवाघाट से लिपुलेख तक दुर्गम पहाड़ियों को काटकर सड़क बनाई। अब बीआरओ संकरे स्थानों पर चौड़ीकरण, नाली, सुरक्षा दीवार, डामरीकरण सहित कई अन्य कार्य कर रही है। वर्तमान में 90 किमी लंबी तवाघाट-लिपुलेख सड़क पर जगह-जगह खतरा बना है।
दोबाट, मालपा, लामारी, बूंदी, छियालेख, गर्ब्यांग सहित कई अन्य हिस्सों पर पहाड़ से मलबा, पत्थर गिरने और सड़क के संकरा होने से दुर्घटनाओं का खतरा बना है। स्थानीय लोग और पर्यटक जान हथेली पर रखकर आवाजाही कर रहे हैं।
बूंदी से छियालेख तक ट्राॅली से भेजी जा रही है निर्माण सामग्री
बूंदी से छियालेख तक दुर्गम चढ़ाई में बीआरओ सड़क निर्माण के लिए ट्राॅली से सामान भेज रहा है। बता दें कि सात किमी लंबी इस दुर्गम चढ़ाई पर सामान से भरे ट्रकों को आवाजाही में दिक्कत होती है। क्योंकि कई स्थानों पर संकरे बैंड हैं। इस कारण बीआरओ ने यहां पर ट्रॉली लगाकर सीमेंट के कट्टे, मशीनों के उपकरण सहित कई अन्य सामान भेजने की व्यवस्था की है। संवाद
छियालेख से गर्ब्यांग तक हल्की बारिश में ही फंस जाते हैं वाहन
पिथौरागढ़। छियालेख से गर्ब्यांग तक हल्की बारिश में कीचड़ हो जाता है जिसमें वाहन फंस जाते हैं जिस कारण पर्यटकों और अन्य लोगों को दिक्कत होती है। संवाद
आदि कैलाश यात्रा के दौरान बीआरओ को सावधानीपूर्वक सड़क चौड़ीकरण के निर्देश दिए गए हैं। यात्रा के दौरान कोई दिक्कतें नहीं होंगी।
- रीना जोशी, डीएम पिथौरागढ़।