पिथौरागढ़। चीन की तकलाकोट मंडी में पिछले चार साल से 45 भारतीय व्यापारियों का एक करोड़ रुपये से अधिक का सामान फंसा है। भारत-चीन व्यापार पर जाने वाले व्यापारी इसी उम्मीद में अपना सामान वहीं छोड़ आए थे कि आगामी वर्ष में इसकी बिक्री की जाएगी लेकिन कोरोना और भारत-चीन संबंधों में तनातनी होने के कारण व्यापार नहीं हो पाया। व्यापारियों को इस बार भी भारत-चीन व्यापार शुरू होने की उम्मीद कम है। इस कारण उन्हें तकलाकोट मंडी में फंसे सामान की चिंता सताने लगी है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ ही समुद्रतल से 17 हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित तकलाकोट में प्रतिवर्ष 11 जून से 31 अक्तूबर तक भारत-चीन के बीच अंतरराष्ट्रीय व्यापार चलता था। वर्ष 2019 में तकलाकोट गए भारतीय व्यापारी बचा सामान इसी उम्मीद में वहीं छोड़कर आए थे कि अगले वर्ष इस सामान की बिक्री करेंगे लेकिन ऐसा नहीं हो सका।
व्यापारियों ने आरोप लगाया कि भारत और राज्य सरकार ने तकलाकोट मंडी में जाने वाले व्यापारियों को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी। उनका चीन में सामान फंसने से काफी नुकसान हुआ है। कोरोना काल में भी उन्हें आर्थिक सहायता नहीं दी गई। उन्होंने सरकार से आर्थिक सहायता देने की मांग की है।
तकलाकोट से अब वापस भी नहीं ला सकते हैं सामान
पिथौरागढ़। भारत-चीन व्यापार पर जाने वाले धारचूला के व्यापारी दिनेश गुंज्याल, जीवन रौंकली, बिशन सिंह गर्ब्याल, चक्कर सिंह गर्ब्याल, रतन सिंह रायपा, दौलत रायपा, इंदर सिंह गर्ब्याल, ऊषा गर्ब्याल, रिंकू गर्ब्याल, दीवान नबियाल आदि का सामान तकलाकोट में फंसा है। इन व्यापारियों का कहना है कि वह तकलाकोट मंडी पहुंचा चुके सामान के कस्टम शुल्क का भुगतान चीन और भारत में कर चुके हैं। इस कारण अब वह सामान वापस भी नहीं ला सकते हैं। संवाद
सौंदर्य प्रसाधन, गुड़, मिश्री की तकलाकोट में अधिक मांग
धारचूला (पिथौरागढ़)। भारत से व्यापारी मुख्य रूप से सौंदर्य प्रसाधन, गुड़, मिश्री, तंबाकू आदि सामान लेकर तकलाकोट मंडी जाते थे। वहां से ऊन, कंबल, याक की पूंछ, जैकेट और जूते लेकर भारत आते थे। तिब्बत में बने जूते, जैकेट और ऊनी गर्म कपड़ों की भारतीय बाजार में अच्छी मांग रहती है। संवाद
चीन की तकलाकोट मंडी में पिछले चार साल से 45 भारतीय व्यापारियों का एक करोड़ रुपये से अधिक का सामान फंसा है। सरकार को व्यापारियों को नुकसान से बचाने के लिए आर्थिक सहायता देनी चाहिए। इस बार भी व्यापार शुरू होने की उम्मीद नहीं है। -दिनेश गुंज्याल, उपाध्यक्ष भारत चीन व्यापार समिति।
भारत-चीन व्यापार मामला भारत सरकार स्तर का है। प्रशासन को इस बाबत अब तक कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं। -रीना जोशी, डीएम पिथौरागढ़।