पिथौरागढ़। वर्ष 1990 में तत्कालीन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने पिथौरागढ़ के लोगों को रई झील का जो सपना दिखाया था वह आज तक पूरा नहीं हो पाया है। झील का कार्य कभी सर्वे से आगे ही नहीं बढ़ पाया। प्रस्तावित झील क्षेत्र में पंडा स्थित डीआरडीओ की जमीन आने के कारण रई झील को बनाने में दिक्कतें हो रही हैं। सिंचाई विभाग झील क्षेत्र की लंबाई घटाने के लिए जल्द ही जमीन का सर्वे करेगा।
रई क्षेत्र में वर्ष 1990 में डेढ़ किमी लंबी झील के निर्माण के लिए यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने रई झील बनाने की घोषणा की थी। उस समय अलग राज्य के लिए चल रहे आंदोलन के कारण झील का सपना ठंडे बस्ते में चला गया। नौ नवंबर 2000 को यूपी से अलग उत्तरांचल के अस्तित्व में आने के बाद फिर रई झील के निर्माण की मांग तेज होने लगी।
छात्र संगठन सहित कई अन्य संगठनों ने रई झील के लिए आंदोलन किए। चुनाव से ठीक पहले पिथौरागढ़ आने वाले हर एक मुख्यमंत्री ने रई झील की घोषणा की। डूब क्षेत्र ज्यादा होने के कारण इसका आकार घटाकर 600 मीटर और अधिकतम चौड़ाई 200 मीटर रखी गई। सिंचाई विभाग ने वर्ष 2013 में 32 करोड़ का प्रस्ताव बनाकर शासन को भेजा था।
झील के निर्माण के लिए आईआईटी रुड़की की टीम ने सर्वे भी किया लेकिन झील नहीं बन पाई। सिंचाई विभाग जल्द ही झील को लेकर राजस्व विभाग की टीम के साथ सर्वे करेगा। इसके बाद रई झील का आकार लंबाई और चौड़ाई नए सिरे से तय की जाएगी।
कोट
रई झील के निर्माण के लिए दोबारा सर्वे किया जाएगा। झील डूब क्षेत्र में डीआरडीओ कार्यालय और उसकी जमीन आने के कारण दिक्कत हो रही है। इसके लिए दोबारा सर्वे किया जाएगा। - कमलेश पांडेय, ईई, सिंचाई विभाग, पिथौरागढ़।