पिथौरागढ़। ट्रेकिंग ग्रुप आदि कैलाश 20-20 ने भगवान भोलेनाथ के निवास स्थल आदि कैलाश में शिव की सवारी नंदी बैल की प्रतिमा स्थापित की है। 40 क्विंटल वजनी इस प्रतिमा को अलवर राजस्थान में तैयार कर यहां लाया गया। पार्वती सरोवर के समीप 14,500 फुट की ऊंचाई पर नंदी की प्रतिमा भी यहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी है। इसी ग्रुप के सदस्यों ने दो वर्ष पूर्व आदि कैलाश में 150 किलो वजनी 28 फुट ऊंचा त्रिशूल भी स्थापित किया था।
ट्रेकिंग ग्रुप आदि कैलाश 20-20 के नाम से बनाए गए ग्रुप में देश भर के लगभग 150 लोग जुड़े हैं। वर्ष 2022 में इस ग्रुप के सदस्यों ने आदि कैलाश के बेस ज्योलिंगकांग में लोहे का त्रिशूल स्थापित किया था। 28 फुट ऊंचे इस त्रिशूल का वजन 150 किलो है। इसे तीन हिस्सों में यहां पहुंचाया गया था। प्रधानमंत्री की आदि कैलाश यात्रा के दौरान यह त्रिशूल वाली तस्वीर काफी वायरल हुई थी। इसके अलावा कालापानी में भी ग्रुप ने एक त्रिशूल स्थापित किया था। इस वर्ष इस ग्रुप के सदस्यों ने संगमरमर के पत्थर को तराशकर बनाई गई नंदी की प्रतिमा आदि कैलाश में पार्वती सरोवर और शिव मंदिर के सामने टीले पर स्थापित की है।
नैनीताल निवासी ग्रुप के सदस्य जगदीश बिष्ट ने बताया कि नंदी की प्रतिमा अलवर राजस्थान में बनवाई गई। इस प्रतिमा को वाहन में रखकर आदि कैलाश तक पहुंचाया गया। लगभग छह लाख की लागत से बनी इस मूर्ति को आदि कैलाश तक पहुंचाने में 70 हजार रुपये का खर्च आया। विधि विधान से मूर्ति को स्थापित किया गया। पार्वती सरोवर क्षेत्र में स्थापित यह नंदी की प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। उन्होंने बताया कि उनकी टीम ने रास्ते में दो कछुए भी स्थापित किए हैं। आने वाले वर्षों में इस क्षेत्र में अन्य देवी-देवताओं की मूर्तियां स्थापित की जाएंगी। इसमें नासिक के भरत जोशी, नैनीताल के जगदीश बिष्ट और दिनेश राठौर, पटना के पंकज, कैलाशी ग्रुप सूरत, जय भोले ग्रुप कल्याण का सहयोग रहा।
दर्शनीय स्थलों को देखकर गद्गद हो रहे श्रद्धालु
पिथौरागढ़। धारचूला की व्यास घाटी में आदि कैलाश और ओम पर्वत को देखने के लिए देश के कोने-कोने से श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। गणेश पर्वत, गौरी कुंड, कुंती किला, पार्वती मुकुट, पांडव पर्वत, व्यास गुफा, नाग पर्वत, नाभि पर्वत, कालापानी में काली मंदिर को देखकर श्रद्धालु काफी खुश नजर आ रहे हैं।