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मां और बेटे का अनमोल रिश्ता: 46 साल बाद साधु बनकर भिक्षा मांगने घर आया बेटा, मां की आखें हुईं नम, पूरी कहानी

Mon, 08 Jun 2026 06:01 PM IST
गायत्री जोशी संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़

सार

पिथौरागढ़ के बेड़ीनाग में 46 साल बाद एक साधु के वेश में भिक्षा मांगने पहुंचे बेटे को मां ने उसकी आवाज और चेहरे से पहचान लिया। मां-बेटे का यह भावुक मिलन देखकर पूरा गांव भावुक हो उठा और दोनों की आंखें नम हो गईं।
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बेड़ीनाग के पौषा पोस्ताला के दौली गाड़ गांव में बाबा बना बेटा और मां। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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पिथौरागढ़ जिले के बेड़ीनाग में मां और बेटे का रिश्ता दुनिया में सबसे अनमोल होता है। मां अपने बेटे की हर खुशी में मुस्कुराती है और हर दुख में उसके साथ खड़ी रहती है। मां की दुआएं बेटे की सबसे बड़ी ताकत बनती हैं। यही ममता इस रिश्ते को सबसे भावुक और पवित्र बनाती है। ऐसा ही हुआ बेड़ीनाग के पौषा पोस्ताला के दौलीगाड़ में। 46 वर्ष बाद मां ने अपने बिछुड़े गुमशुदा बेटे को साधु के वेष में भी पहचान लिया। पहचानते ही मां भावुक होकर फफक कर रो पड़ीं और बाबा बना बेटा भी भावुक हो गया।

दौली गाड़ गांव में तारा दत्त उपाध्याय का बेटा बुद्धि बल्लभ 15 वर्ष की उम्र में घर से अचानक लापता हो गया था। उसे खोजने की काफी कोशिश की लेकिन उसका पता नहीं चल सका। वर्ष 2005 में तारा दत्त उपाध्याय के निधन के बाद उनकी पत्नी नंदी देवी ने बेटे की वापसी की आस नहीं छोड़ी। बेटे की वापसी की आस में नंदी देवी (85) उम्र के अंतिम पड़ाव में पहुंच गई। शुक्रवार को बुद्धि बल्लभ जब घर के दरवाजे पर भिक्षा मांगने पहुंचा तो नंदी देवी ने उसकी आवाज एवं चेहरा पहचान लिया। वह साधु बने बेटे को गले लगाते हुए फफक कर रो पड़ीं। बेटा भी भावुक हो गया। आसपास के परिवार के लोग मौके पर पहुंचे और मां और बेटे के मिलन को देख सभी की आंखें नम हो गईं। बुद्धि बल्लभ ने बताया कि घर से जाने के बाद काफी समय वाहनों में काम किया। बाद में वह हरिद्वार में रहे। राजस्थान स्थित बीकानेर के एक मंदिर रहकर वह साधु बन गए। बताया कि मां के हाथों से भिक्षा लेकर आने की परंपरा के तहत वह घर पहुंचे।

ग्रामीणों ने बाबा बुद्ध नाथ से लिया आशीर्वाद

बुद्धिबल्लभ उपाध्याय ने साधु का वेष धारण करने के दौरान अपना नाम बदलकर बुद्ध नाथ रखा है। पता भी हिमाचल प्रदेश का दिया है। बुद्ध नाथ की 12 फीट से अधिक लंबी जटा है। उनके घर पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण उनका आशीर्वाद लेने पहुंचे। साधु ने अपने पिता एवं अन्य परिजनों की जानकारी भी प्राप्त की। बेड़ीनाग से चचेरे भाई आनंद बल्लभ उपाध्याय भी अपने परिवार के साथ उनसे मिलने पहुंचे।

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