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कहीं पंचेश्वर बांध के निर्माण में न पड़ जाए नेपाल के विरोध की काली छाया

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भक्त दर्शन पांडेय, पिथौरागढ़। नेपाल द्वारा नए नक्शे में भारत के कालापानी और लिपुलेेख को अपना हिस्सा बताने से दो मित्र राष्ट्रों के बीच तल्खी बढ़ती जा रही है। नेपाल का एक युवा संगठन जिस तरह से लिपुलेख को भारत के कब्जे से मुक्त कराने की मंशा से यात्रा कर रहा है उससे कड़वाहट और अधिक बढ़ने के आसार हैं। इसका असर एशिया की सबसे बड़ी पंचेश्वर जल विद्युत परियोजना के निर्माण पर भी पड़ सकता है। भारत-नेपाल सीमा पर दोनों देशों का सीमांकन करने वाली महाकाली नदी में पंचेश्वर में जल विद्युत परियोजना का निर्माण प्रस्तावित है। पिछले चार दशकों से प्रस्तावित इस परियोजना के निर्माण की दिशा में पिछले दो तीन सालों से दोनों देश आगे बढ़े हैं। इस बहुउद्देश्यीय परियोजना से छह हजार मेगावॉट से अधिक की बिजली पैदा करने की योजना है। पंचेश्वर में बनने वाला बांध एशिया का सबसे बड़ा बांध होगा। महाकाली नदी पर प्रस्तावित पंचेश्वर बांध के लिए भारत और नेपाल की विशेषज्ञ समूह समिति का गठन भी किया गया है। अब तक परियोजना के निर्माण के लिए भारत और नेपाल देशों में बांध के डूब क्षेत्र में आने वाले गांवों और कस्बों सहित अन्य स्थलों का चिन्हीकरण का काम भी पूरा हो चुका है। डूब प्रभावित पिथौरागढ़, चंपावत और अल्मोड़ा जिलों के 123 गांवों का विस्थापन होना है। परियोजना निर्माण को लेकर भारत में जन सुनवाई भी की जा चुकी है जिसमें परियोजना के पक्ष और विपक्ष में प्रभावितों ने अपनी-अपनी राय रखी थी। केंद्र सरकार के निर्देश पर परियोजना के निर्माण लिए कंपनी ने इसकी डीपीआर भी तैयार कर दी है। पंचेश्वर बांध के निर्माण से बिजली उत्पादन तो होगा ही भारत के 259000 हेक्टेअर और नेपाल के 170000 हेक्टेअर भू-भाग को सिंचाई के लिए भी पर्याप्त पानी मिल सकेगा। भारत की योजना बांध को जल परिवहन से जोड़ने की भी है। जिससे पहाड़ मैदान की दूरी कम होगी, साथ ही रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीदें हैं। नेपाल को भी इस बांध से बड़ा फायदा होना है। लेकिन भारत का अभिन्न हिस्सा रहे कालापानी और लिपुलेख को लेकर नेपाल जिस तरह की गतिविधि कर रहा है उससे इस बांध के निर्माण पर भी संकट के काले बादल छा सकते हैं। -::: ड्रीम प्रोजेक्ट है यह : अजय टम्टा ::: "पंचेश्वर जल विद्युत परियोजना भारत का ड्रीम प्रोजेक्ट है। इस परियोजना से दोनों देशों को लाभ मिलेगा। परियोजना के निर्माण में किसी तरह की बाधा नहीं आएगी। दोनों देशों के बीच हमेशा अच्छे संंबंध रहे हैं। मामले का हल बातचीत से निकाला जाएगा।" -अजय टम्टा, सांसद अल्मोड़ा-पिथौरागढ़ संसदीय क्षेत्र।
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